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Thalapathy Vijay Political Movies OTT: थलापति विजय को 10 मई 2026 को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनते सबने देखा, मगर इसकी स्क्रिप्ट दशकों पहले लिख दी गई थी. उन्होंने अपनी जिन फिल्मों से पॉलिटिकल ड्रामा का ट्रेलर दिखाया था, वह आज अलग-अलग ओटीटी प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं. इन फिल्मों में थलापति सिर्फ डायलॉग नहीं बोल रहे थे, बल्कि अपने किरदारों को जी रहे थे, जिसने उन्हें आगे चलकर ‘जन नायक’ बनाया. इन फिल्मों के जरिये सामाजिक मुद्दों को उठाया, जन्हें रिलीज के वक्त राजनीतिक विरोध का भी सामना करना पड़ा. इससे साबित हुआ कि उनकी फिल्में सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं हैं, वह सजग रूप से सामाजिक-राजनैतिक मुद्दों पर हस्तक्षेप कर रहे थे. 2002 की ‘थमिजहन’ से शुरू हुआ यह सफर ‘थलाइवा’ के विवादों और ‘कत्थी’ व ‘मेर्सल’ जैसे सामाजिक मुद्दों से होता हुआ ‘सरकार’ तक पहुंचा, जहां उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सीधी जंग लड़ी. उन्होंने बहुत चतुराई से एमजीआर की विरासत को भी अपनाया. आखिर में उनकी फिल्मों के असरदार डायलॉग्स और इमेज ने उन्हें पर्दे के हीरो से असल जिंदगी का ‘जन नायक’ बना दिया.

नई दिल्ली: 10 मई 2026 को जब विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तो किसी को हैरानी नहीं हुई. असल में उनके फैंस बरसों से उनकी फिल्मों में इसका ‘ट्रेलर’ देख रहे थे. रजनीकांत और कमल हासन जैसे दिग्गज जो न कर सके, वो विजय ने कर दिखाया. उनकी फिल्मों के डायलॉग्स सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सत्ता की सीढ़ी थे.

विजय ने राजनीति का बीज 2002 की फिल्म ‘थमिजहन’ (Thamizhan) से ही बो दिया था. इसमें विजय ने एक ऐसे वकील का रोल निभाया जो कानून को आम जनता तक पहुंचाना चाहता था. प्रियंका चोपड़ा की पहली फिल्म ने विजय की इमेज एक ऐसे हीरो के रूप में बनाई जो सिस्टम के अंदर रहकर बदलाव लाना चाहता है. फिल्म अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर मौजूद है.

विजय ने बहुत चतुराई से पूर्व सीएम एमजीआर (MGR) की विरासत को अपनाया. 2003 की ‘वसीगरा’ (Vaseegara) में उन्होंने पहली बार एमजीआर की तस्वीर के आगे आरती की. इसके बाद, ‘बिगिल’ और ‘मेर्सल’ जैसी फिल्मों में भी एमजीआर के गानों और तस्वीरों का इस्तेमाल करके उन्होंने खुद को उनके वारिस के तौर पर पेश किया. फिल्म यूट्यूब के अलावा जी5 पर देखी जा सकती है.
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2013 में आई ‘थलाइवा’ (Thalaivaa) के साथ विवाद शुरू हुए. फिल्म की टैगलाइन थी ‘लीड करने का समय’ आ गया है. उस वक्त की सरकार को यह एक चुनौती लगी. फिल्म को रोकने की कोशिश हुई, बम की धमकियां मिलीं, जिससे यह साफ हो गया कि राजनीति के गलियारों में विजय के नाम की चर्चा शुरू हो चुकी है. इस फिल्म को आप ‘डिज्नी+हॉटस्टार’ पर देख सकते हैं.

फिल्म ‘कत्थी’ (Kaththi) में विजय ने कॉर्पोरेट कंपनियों द्वारा किसानों के शोषण का मुद्दा उठाया. हालांकि, उन पर सवाल भी उठे क्योंकि वो खुद कोका-कोला के विज्ञापन कर चुके थे, लेकिन इस फिल्म ने उन्हें एक ऐसे सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में पेश किया जो गरीबों और बुजुर्गों के हक के लिए लड़ता है. आप इसे सन एनएक्सटी (Sun NXT) में देख सकते हैं.

साल 2017 में आई ‘मेर्सल’ (Mersal) ने तो दिल्ली तक हलचल मचा दी. इसमें विजय ने जीएसटी (GST) और स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठाए. बीजेपी नेताओं ने इसका विरोध किया, जिससे फिल्म को मुफ्त की पब्लिसिटी मिली. इसी समय लोगों को यकीन हो गया कि विजय अब सिर्फ एक्टिंग नहीं कर रहे, बल्कि राजनीति बदलाव के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं. यह फिल्म आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.

2018 की फिल्म ‘सरकार’ (Sarkar) उनके राजनीतिक सफर का सबसे साफ संकेत थी. इसमें उन्होंने एक एनआरआई का रोल निभाया जो वोट चोरी के खिलाफ लड़ता है और चुनाव जीतकर बदलाव लाता है. फिल्म के ऑडियो लॉन्च पर उन्होंने साफ कहा था, ‘अगर मैं सीएम बना, तो एक्टिंग नहीं करूंगा, ईमानदारी से काम करूंगा.’ यह फिल्म अमेजन प्राइम वीडियो पर मौजदू है.

