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Akshay Kumar Flop Movies: बॉलीवुड के सुपरस्टार का करियर जबरदस्त उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उन्होंने 1997-1999 के बीच लगातार 14 फ्लॉप फिल्में देने के बावजूद शानदार वापसी की. उन्होंने कोविड के बाद ‘सम्राट पृथ्वीराज’ और ‘सेल्फी’ जैसी फिल्मों से भी करियर में मुश्किल दौर देखा था. क्रिटिक्स का मानना है कि जल्दबाजी, ओवरएक्सपोजर और रीमेक पर ज्यादा निर्भरता उनकी असफलता की बड़ी वजह बनी. हालांकि, सुपरस्टार ने अपनी गलतियों को स्वीकारा और खुद को बदला. यही खूबियां उन्हें’किंग ऑफ कमबैक्स’ बनाती है. उन्होंने ‘भूत बंगला’ से जबरदस्त वापसी की है.

नई दिल्ली: बॉलीवुड के असली ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार का फिल्मी सफर किसी रोलर-कोस्टर राइड जैसी है. उन्होंने अपनी मेहनत से इंडस्ट्री में ऊंचा मुकाम हासिल किया, वहीं उनके करियर में फ्लॉप फिल्मों की एक ऐसी लंबी फेहरिस्त भी है जो किसी को भी हैरान कर सकती है. उनके करियर का ग्राफ कभी आसमान छूता है, तो कभी जमीन पर आ गिरता है, जिससे उन्हें ‘किंग ऑफ कमबैक्स’ का टैग भी मिला है. (फोटो साभार: IMDb)

अक्षय के करियर का सबसे डरावना दौर 1997 से 1999 के बीच आया था. उस समय अक्षय ने लगातार 14 फ्लॉप फिल्में दी थीं. सोचिए, एक के बाद एक 14 फिल्में पिटने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी. अक्षय खुद मानते हैं कि वह उनके करियर का सबसे निचला स्तर था, जब उन्हें लगने लगा था कि अब सब खत्म हो गया है, लेकिन खिलाड़ी ने फिर भी मैदान नहीं छोड़ा. (फोटो साभार: IMDb)

अगर हम आज के समय की बात करें, तो 2021 के बाद अक्षय की किस्मत जैसे फिर से रूठ गई थी. कोरोना काल के बाद ‘सूर्यवंशी’ जैसी हिट देने के बाद उन्होंने पिछले 4 सालों में लगभग 10 से ज्यादा फ्लॉप और ‘डिजास्टर’ फिल्में दी हैं. इस लिस्ट में ‘सेल्फी’, ‘राम सेतु’ और ‘रक्षा बंधन’ जैसी फिल्मों का नाम शामिल है, जो दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने में पूरी तरह नाकाम रहीं. (फोटो साभार: IMDb)
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क्रिटिक्स का मानना है कि अक्षय की फिल्मों के इस तरह पिटने की बड़ी वजह ‘ओवरएक्सपोजर’ है. वह साल में चार-पांच फिल्में करते हैं और अक्सर 40 से 50 दिनों में शूटिंग खत्म कर देते हैं. दर्शकों के बीच उनकी वही पुरानी देशभक्ति वाली फिल्में और साउथ की फिल्मों के रीमेक अब बोरियत पैदा करने लगे थे. लोगों को अब कुछ नया और फ्रेश कॉन्टेंट चाहिए, जो अक्षय की हालिया फिल्मों में कम दिखा. (फोटो साभार: IMDb)

साल 2022 तो अक्षय के लिए किसी बुरे सपने जैसा रहा. बड़े बजट की ऐतिहासिक फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी और इसे एक बड़ा ‘डिजास्टर’ घोषित किया गया. उसी साल आई ‘बच्चन पांडे’ का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा. भारी-भरकम स्टारकास्ट और तगड़े प्रमोशन के बावजूद ये फिल्में बजट का आधा हिस्सा भी वसूल नहीं कर पाईं. (फोटो साभार: IMDb)

पुरानी असफलताओं को देखें तो 2012 की ‘जोकर’ आज भी एक मिसाल के तौर पर याद की जाती है कि एक फिल्म कैसी नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा, साल 2009 में ‘8×10 तस्वीर’ और साल 2005 में आई ‘इंसान’ जैसी थ्रिलर फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह असफल रही थीं. अक्षय कुमार की शुरुआती करियर की फिल्में जैसे ‘डांसर’ और ‘मिस्टर बॉन्ड’ ने भी उन्हें शुरुआती झटके दिए थे. (फोटो साभार: IMDb)

अक्षय कुमार की एक खास बात यह है कि वह अपनी नाकामियों को छुपाते नहीं हैं. उन्होंने कई इंटरव्यू में स्वीकार किया है कि जब फिल्में नहीं चलतीं, तो इसका मतलब है कि दर्शकों को कुछ नया चाहिए. उन्होंने माना कि बार-बार एक ही तरह का कॉन्टेंट परोसना और रीमेक फिल्मों पर ज्यादा भरोसा करना उनके लिए भारी पड़ा है और अब उन्हें अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है. (फोटो साभार: IMDb)

अक्षय कुमार करियर की उतार-चढ़ावों के बावजूद आज भी मजबूती से खड़े हैं. उनकी काबिलियत इसी में है कि वह जनता के फीडबैक को गंभीरता से लेते हैं और फिर से वापसी करने की कोशिश में जुट जाते हैं. 14 फ्लॉप के बाद भी जो सुपरस्टार बना रह सकता है, वह इस मौजूदा बुरे दौर से भी निकल ही जाएगा, बस फैंस को उनके पुराने ‘खिलाड़ी’ वाले जादू का इंतजार है. अक्षय कुमार की पिछली रिलीज ‘भूत बंगला’ को दर्शकों का प्यार मिला. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही.
(फोटो साभार: IMDb)

