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फिल्म इंडस्ट्री में शुक्रवार और खास दिनों को अक्सर किस्मत बदलने वाला माना जाता है, लेकिन कैलेंडर का एक पन्ना ऐसा भी है, जिसने बॉलीवुड के कुछ बड़े नामों की सफलता को रोक दिया है. हम बात कर रहे हैं 14 मई की. बॉक्स ऑफिस इंडिया के डेटा के मुताबिक, यह तारीख फिल्म इंडस्ट्री के लिए किसी ‘ब्लैक होल’ से कम नहीं रही है. 1999 से 2010 तक, इस तारीख को रिलीज हुई हर बड़ी फिल्म को ‘डिजास्टर’ या ‘फ्लॉप’ करार दिया गया. हैरानी की बात है कि बॉलीवुड के 4 ‘धुरंधर’ भी इस बुरी किस्मत से बच नहीं पाए, जिन्हें उस समय सफलता की गारंटी माना जाता था. आइए स्लाइड-बाय-स्लाइड उन फिल्मों पर नजर डालते हैं, जिनके लिए 14 मई एक बुरा सपना साबित हुआ.

नई दिल्ली. ज्योतिष, न्यूमरोलॉजी और सही तारीख को अक्सर बॉलीवुड फिल्मों की सफलता के पीछे की वजह माना जाता है. लेकिन, 14 मई ने इन सभी दावों को गलत साबित कर दिया है. पिछले कुछ दशकों को देखें, तो इस दिन रिलीज हुई फिल्मों ने प्रोड्यूसर्स की जेबें खाली करने के अलावा कुछ नहीं किया. फिल्म का बजट कितना भी हो या स्टार कास्ट कितनी भी हो, 14 मई का ‘श्राप’ सब पर भारी पड़ा है. नीचे हम अलग-अलग स्लाइड्स के जरिए आपको उन फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो इस दिन रिलीज हुईं और इतिहास में ‘डिजास्टर’ के तौर पर दर्ज हुईं.

लकीर (14 मई 2004)- डिजास्टर: यह 14 मई को सबसे ज्यादा चर्चित फिल्मों में से एक है, क्योंकि इसमें बॉलीवुड के चार ‘धुरंधर’ एक साथ थे. फिल्म में सनी देओल, सुनील शेट्टी, जॉन अब्राहम और सोहेल खान जैसे स्टार्स थे. स्टार्स और बेहतरीन गानों के बावजूद, फिल्म की कहानी और कमजोर डायरेक्शन की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई. सनी देओल और सुनील शेट्टी की एक्शन इमेज भी इसे नहीं बचा सकी. ‘लकीर’ की नाकामी ने साबित कर दिया कि सिर्फ बड़े नाम ही किसी फिल्म को सफल नहीं बनाते, बल्कि किस्मत भी जरूरी है, जो शायद उस दिन नहीं थी.

रन (14 मई 2004)- फ्लॉप: अभिषेक बच्चन और भूमिका चावला की फिल्म ‘रन’ उसी दिन रिलीज हुई थी जिस दिन ‘लकीर’ रिलीज हुई थी. यह फिल्म आज विजय राज के ‘कौवा बिरयानी’ कॉमेडी सीन के लिए याद की जाती है, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसे फ्लॉप घोषित कर दिया गया. फिल्म के बेहतरीन एक्शन और दमदार कॉमेडी के बावजूद, दर्शक थिएटर नहीं गए और फिल्म का कलेक्शन उम्मीद से बहुत कम रहा.
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फूल और आग (14 मई 1999) – डिजास्टर: 14 मई 1999 को मशहूर एक्टर मिथुन चक्रवर्ती और जैकी श्रॉफ स्टारर फिल्म ‘फूल और आग’ रिलीज हुई थी. टीएलवी प्रसाद के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म को इसकी खराब स्क्रिप्ट और कमजोर प्रोडक्शन के कारण दर्शकों ने पूरी तरह से रिजेक्ट कर दिया था. मिथुन दा की जबरदस्त फैन फॉलोइंग के बावजूद, यह बॉक्स ऑफिस पर डिजास्टर साबित हुई. 14 मई के इतिहास में यह पहली बड़ी फिल्म थी जिसकी उस तारीख को नेगेटिव ओपनिंग हुई थी.

खूनी इलाका (14 मई 1999) – डिजास्टर: ‘फूल और आग’ के साथ, एक छोटे बजट की हॉरर फिल्म ‘खूनी इलाका’ भी उसी दिन रिलीज हुई थी. हालांकि उस समय हॉरर फिल्मों की अपनी ऑडियंस थी, लेकिन 14 मई का असर इस फिल्म पर भी पड़ा. फिल्म को खराब ओपनिंग मिली और पहले हफ्ते में ही इसे थिएटर से हटा लिया गया. बॉक्स ऑफिस इंडिया के मुताबिक, फिल्म का कलेक्शन इतना कम था कि इसे ऑफिशियली डिजास्टर घोषित कर दिया गया. एक ही दिन दो डिजास्टर फिल्मों का रिलीज होना फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक बुरा संकेत था.

बम बम बोले (14 मई 2010) – डिजास्टर: 2010 में डायरेक्टर प्रियदर्शन ने दर्शील सफारी (तारे जमीन पर फेम) को स्टार करते हुए ‘बम बम बोले’ बनाई. यह ईरानी फिल्म ‘चिल्ड्रन ऑफ हेवन’ की रीमेक थी. प्रियदर्शन जैसे सफल डायरेक्टर के बावजूद, यह फिल्म 14 मई की बदकिस्मती का शिकार हो गई. क्रिटिक्स ने फिल्म के सब्जेक्ट मैटर और सिंप्लिसिटी की तारीफ की, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इसे कोई कस्टमर नहीं मिला. यह फिल्म भी डिजास्टर की कैटेगरी में आ गई, जिससे यह साफ हो गया कि यह तारीख सिर्फ कमर्शियल फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि आर्ट फिल्मों के लिए भी खतरनाक है.

कुश्ती (14 मई 2010) – डिजास्टर: ‘बम बम बोले’ के साथ, राजपाल यादव और द ग्रेट खली की फिल्म ‘कुश्ती’ भी 14 मई 2010 को रिलीज हुई थी. उस समय खली की पॉपुलैरिटी अपने पीक पर थी और हर कोई राजपाल यादव की कॉमेडी का दीवाना था. इसके बावजूद, फिल्म ने बहुत बुरा परफॉर्म किया. लोग ‘कुश्ती’ देखने नहीं आए और फिल्म खुद एक डिजास्टर साबित हुई. एक ही दिन दो फिल्मों के फेल होने से 14 मई का डर और बढ़ गया.

इन 6 फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन देखने के बाद, यह साफ है कि 14 मई बॉलीवुड के लिए कभी भी लकी डेट नहीं रही. चाहे वह 1999 हो, 2004 हो या 2010 हो, इतिहास खुद को दोहराता है. बॉक्स ऑफिस इंडिया के डेटा से पता चलता है कि इस दिन रिलीज हुई फिल्मों से उनके मेकर्स को काफी नुकसान हुआ है.

