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कवि गोपालदास नीरज जब फिल्म ‘कन्यादान’ के लिए एक गाना लिखकर शंकर-जयकिशन के पास पहुंचे, तो उन्हें बहुत गुस्सा आया. शंकर ने गाने को बकवास बताया, तो बेइज्जती से आहत कवि ने भी झुंझलाकर गीत को फाड़ दिया. बाद में शंकर-जयकिशन ने अपनी शर्त पर गोपालदास नीरज से गाना लिखने को कहा, तो उन्होंने भी अपनी शर्त रख दी. कवि ने फिर ऐसी रचना कर डाली कि हर कोई अभिभूत था. आज उस गीत की गिनती मोहम्मद रफी के कालजयी गानों में होती है.

नई दिल्ली: मोहम्मद रफी के जिस गाने की हम बात कर रहे हैं, उसे कवि गोपालदास नीरज ने लिखा था. जब फिल्म ‘कन्यादान’ के एक रोमांटिक सिचुएशन पर गोपालदास नीरज से गीत लिखने के लिए कहा गया, तो उन्होंने शंकर-जयशिकन से धुन लिए बिना ही गीत लिख दिया. उन्होंने गीत फिल्म के प्रोड्यूसर राजेंद्र भाटिया को दिखाया. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

कवि गोपालदास का लिखा वह गाना प्रोड्यूसर को पसंद आया, मगर उन्होंने कवि से कहा कि मुझे तो आपका गाना पसंद है, लेकिन क्या इसे शंकर-जयकिशन पसंद करेंगे? जब गोपालदास यह गाना शंकर-जयकिशन के पास लेकर गए, तो शंकर को बड़ा गुस्सा आया. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

शंकर ने तमतमाते हुए कवि गोपालदास नीरज से कहा कि यह गीत तो बहुत बकवास है, लीरिक्स बिल्कुल पसंद नहीं आए. गोपालदास नीरज भी झुंझला गए और उन्होंने सबके सामने कागज में लिखा वो गीत फाड़ दिया. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
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प्रोड्यूसर ने कवि की नाराजगी से सकपकाते हुए कहा कि नीरज जी यह गीत यहां इस्तेमाल नहीं हुआ, मगर कहीं और इस्तेमाल हो सकता था. इसे फाड़ने की क्या जरूरत थी? कवि नीरज ने फिर शांति से जवाब दिया कि अगर म्यूजिक डायरेक्टर को यह गाना पसंद नहीं है, तो मैं इसका क्या करूंगा? (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

कुछ वक्त बाद जब मामला शांत हो गया, तो शंकर-जयकिशन ने एक बार फिर गोपालदास नीरज से संपर्क किया. उन्होंने एक धुन बनाई थी और उस पर कवि गोपालदास को गाना लिखने को कहा. वे कवि से बोले कि अगर इस धुन पर आप मनमुताबिक गाना लिख देंगे, तो हम मानेंगे कि आप गीतकार हो.

कवि गोपालदास नीरज ने शंकर-जयकिशन की चुनौती स्वीकार की. उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर राजेंद्र भाटिया की ओर देखकर कहा कि अगर मैंने सिचुएशन पर कामयाब गाना लिख दिया, तो मैं जो चाहूंगा वह मुझे दोगे? राजेंद्र भाटिया भी उसूल के पक्के थे. उन्होंने कहा कि अगर मनचाहा गीत लिख दोगे, तो जो आप चाहोगे, वह आपको दे देंगे. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

कवि गोपालदास नीरज ने शंकर-जयकिशन की धुन पर फिर एक गीत लिखा जो सबको पसंद आया. शंकर ने जब अपनी धुन पर कवि का गीत पढ़ा, तो वह इतना खुश हुए कि उन्होंने गोपालदास नीरज को गले लगा लिया. वह कह उठे- क्या कमाल का गीत लिखा है.

राजेंद्र भाटिया वहां मौजूद जो यह सब देख रहे थे, उनकी ओर कवि गोपालदास ने रुख किया और अपनी शर्त याद दिलाई. जब प्रोड्यूसर ने उन्हें अपनी मनचाही चीज मांगने के लिए कहा, तो गोपालदास बोले कि मेरे पास कार नहीं है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजेंद्र भाटिया ने तुरंत अपनी कार की चाबी निकाली और कवि गोपालदास को सौंप दी. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

कवि गोपालदास ने शंकर-जयकिशन की धुन पर जो गीत लिखा था, वह 1968 की फिल्म ‘कन्यादान’ का गाना है- ‘लिखे जो खत तुझे वो तेरी याद में.’ इसे मोहम्मद रफी ने बड़े खूबसूरत अंदाज में गाया था. राजेंद्र भाटिया ने अपनी जो कार गोपालदास नीरज को गिफ्ट की थी, वह इस गीत की पिक्चराइजेशन में भी दिखाई देती है. कहते हैं कि यह कार सालों तक गोपालदास नीरज के पास रही. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

