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सिनेमाई इतिहास में एक ऐसा दौर आया है जहां अरबों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर नामोनिशान मिट गया. लगभग 1400 करोड़ के भारी-भरकम बजट और दिग्गज सितारों से सजी फिल्म अब तक की सबसे बड़ी फ्लॉप साबित हुई है. हैरानी की बात यह है कि दुनियाभर में यह फिल्म महज 6 करोड़ ही बटोर सकी, जो इसकी लागत का 1 फीसदी भी नहीं है. मेकर्स को बॉक्स ऑफिस पर 99 फीसदी से भी ज्यादा घाटा झेलना पड़ा.

नई दिल्ली. आजकल दुनियाभर की फिल्म इंडस्ट्रीज एक से बढ़कर एक बड़े बजट की फिल्में बन रही हैं. भारतीय सिनेमा भी ‘वाराणसी’ और ‘रामायण’ जैसी अब तक की सबसे महंगी फिल्मों के जरिए पूरी दुनिया पर छा जाने की तैयारी में है. कोरियाई फिल्में भी इसी राह पर चलते हुए काफी बड़े लेवल पर काम कर रही हैं, तो वहीं चीन ने हाल ही में ‘ने झा 2’ के जरिए अपनी पहली बिलियन डॉलर की ब्लॉकबस्टर फिल्म दी है.

इसी होड़ में सऊदी अरब की इंडस्ट्री ने भी किस्मत आजमाने की कोशिश की और हॉलीवुड के बड़े सितारों को लेकर बहुत ही बड़े स्केल पर एक फिल्म बनाई. लेकिन, अफसोस कि इतनी भारी-भरकम लागत और तामझाम के बावजूद नतीजा बेहद खराब रहा. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरी और इतिहास की सबसे बड़ी महाफ्लॉप साबित हुई.

नवंबर 2021 में सऊदी अरब के मीडिया समूह एमबीसी ग्रुप की फिल्म कंपनी एमबीसी स्टूडियोज ने ‘डेजर्ट वॉरियरट’ नाम की बड़ी फिल्म का ऐलान किया. इस फिल्म का मकसद सऊदी फिल्म इंडस्ट्री में एक नई जान फूंकना था. फिल्म के निर्देशन की कमान ‘राइज ऑफ द प्लैनेट ऑफ द एप्स’ फेम रूपर्ट व्याट को सौंपी गई और इसे कई बड़े स्टूडियोज ने मिलकर प्रोड्यूस किया.
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सातवीं सदी के अरब की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म की कहानी राजकुमारी हिंद के इर्द-गिर्द घूमती है, जो महान योद्धा हंजला की मदद से सम्राट किसरा के खिलाफ मोर्चा खोलती है. फिल्म की स्टार कास्ट काफी तगड़ी थी. मार्वल के नए कैप्टन अमेरिका यानी एंथनी मैकी ने हंजला का किरदार निभाया, जबकि ऑस्कर विजेता बेन किंग्सले सम्राट किसरा की भूमिका में दिखे.

इनके अलावा फिल्म में शार्ल्टो कोपले और ब्रिटिश-सऊदी एक्ट्रेस आयशा हार्ट जैसे बड़े नाम भी शामिल थे. यह प्रोजेक्ट वाकई में हॉलीवुड और अरब सिनेमा का एक अनोखा संगम था. इस फिल्म को बनाने के लिए सऊदी अरब में अंतरराष्ट्रीय क्रू बुलाया गया ताकि स्थानीय लोगों को ट्रेनिंग दी जा सके.

आलम यह था कि सेट पर हर दिन 400 से 500 लोगों की भीड़ रहती थी. भारी-भरकम स्टारकास्ट की फीस और प्रोडक्शन में हुई देरी की वजह से फिल्म का बजट बढ़कर 150 मिलियन डॉलर यानी 1400 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा. रिलीज से पहले यह फिल्म 2 साल से ज्यादा समय तक पोस्ट-प्रोडक्शन (एडिटिंग और ग्राफिक्स) के काम में फंसी रही और आखिरकार 2025 के ज्यूरिख फिल्म फेस्टिवल में इसे पहली बार दिखाया गया. अप्रैल 2026 में जब इसे दुनियाभर के सिनेमाघरों में उतारा गया, तो यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई.

हैरानी की बात तो यह रही कि इस फिल्म को न केवल अमेरिका में, बल्कि खुद सऊदी अरब में भी दर्शकों ने सिरे से नकार दिया. उत्तरी अमेरिका में यह फिल्म 1010 सिनेमाघरों में रिलीज हुई, लेकिन वहां इसने महज 472,000 डॉलर की कमाई की, जो किसी भी बड़ी फिल्म के लिए अब तक की सबसे खराब ओपनिंग में से एक है.

वहीं सऊदी अरब में फिल्म का हाल और भी बुरा रहा. वहां अपने ओपनिंग वीकेंड पर यह आठवें नंबर पर रही और सिर्फ 87 हजार डॉलर ही जुटा पाई. बाकी मिडिल ईस्ट के देशों को मिलाकर भी इसकी झोली में 1.40 लाख डॉलर से कम ही आए. शुरुआती दो हफ्तों के लचर प्रदर्शन के बाद दुनिया भर के सिनेमाघरों से इसकी छुट्टी हो गई.

फिल्म का कुल वर्ल्डवाइड कलेक्शन महज 6,65000 (करीब 6 करोड़) रहा, जो इसकी लागत का 0.4 फीसदी भी नहीं है. अपनी कुल लागत पर 99.6 फीसदी का घाटा झेलने वाली यह फिल्म सिनेमाई इतिहास की सबसे बड़ी फ्लॉप बन गई है. किसी भी फीचर फिल्म के लिए इतना भारी नुकसान आज से पहले कभी नहीं देखा गया.

‘डेजर्ट वॉरियर’ की इस असफलता के पीछे कमजोर मार्केटिंग और फिल्म को लेकर फैली निगेटिविटी सबसे बड़ी वजह रही. लंबे समय तक पोस्ट-प्रोडक्शन में फंसे रहने के कारण इस फिल्म ने वो सारा बज खो दिया, जो इसकी घोषणा और शूटिंग के वक्त बना था. पश्चिमी देशों में इसका प्रमोशन न के बराबर हुआ और फिल्म के लीड एक्टर एंथनी मैकी ने भी इससे दूरी बनाए रखी.

रिलीज के बाद यह बिग बजट फिल्म दर्शकों का ध्यान खींचने में तो नाकाम रही ही, इसे अच्छे रिव्यू तक नहीं मिल पाए. रॉटेन टोमेटोज पर इस फिल्म के केवल 18 रिव्यू मौजूद हैं और इसकी रेटिंग भी महज 28 फीसदी है. यानी पहले से ही कम चर्चा और ऊपर से खराब रेटिंग ने फिल्म की किस्मत पर पूरी तरह ताला लगा दिया और यह बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह तबाह हो गई.

