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50 के दशक की टाप हीरोइन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं है, जो नए आजाद भारत का चेहरा मानी जाती थीं. एक मशहूर फिल्ममेकर के साथ एक्ट्रेस का 9 सालों तक अटूट रिश्ता रहा. लेकिन जब हीरोइन ने अपनी राहें अलग कर गुपचुप शादी रचाई, तो वह फिल्ममेकर इस कदर टूट गया कि नशे में धुत्त होकर रात-रातभर बाथटब में रोता था. एक्ट्रेस ने अपने करियर के शिखर पर परिवार को चुना, लेकिन नियति ने ऐसा खेल खेला कि बेटे की पहली फिल्म की रिलीज से महज तीन दिन पहले उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.

नई दिल्ली. नरगिस अपने जमाने की टॉप हीरोइनों में शुमार थीं. उनका जन्म रावलपिंडी में फातिमा राशिद के रूप में हुआ था. उनके संगीतकार पिता ने उन्हें नरगिस नाम दिया. महज 6 साल की उम्र से ही उन्होंने फिल्मों में कदम रख दिया था और 20 की होते-होते वह बॉलीवुड की सबसे बड़ी फीमेल सुपरस्टार बन चुकी थीं. वैसे नरगिस ने सुनील दत्त से शादी की थी, लेकिन उससे पहले उनकी राज कपूर के साथ रिश्ते की खूब चर्चा रही. आज नरगिस की डेथ एनिवर्सरी है. इस मौके पर हम आपको बताते हैं कि सुनील दत्त से नरगिस की शादी होने के बाद राज कपूर कैसे बुरी तरह टूट गए थे.

राज कपूर और नरगिस की पहली मुलाकात 1948 में फिल्म अंदाज के सेट पर हुई थी. उस समय नरगिस सुपरस्टार बन चुकी थीं, जबकि राज कपूर बेहद महत्वाकांक्षी, मिलनसार और शादीशुदा थे. अगले 9 सालों तक परदे और असल जिंदगी में यह जोड़ी अटूट रही. लेकिन जब नरगिस को यह अहसास हुआ कि राज कपूर अपनी पत्नी को कभी नहीं छोड़ेंगे, तो उन्होंने इस रिश्ते को खत्म करने का फैसला किया.

नरगिस ने राज कपूर को बताए बिना एक नई फिल्म साइन कर ली. राज कपूर को जब इस बात की खबर मिली, तो वह नरगिस से काफी नाराज हो गए. वह फिल्म कोई और नहीं, बल्कि ‘मदर इंडिया’ थी. साल 1957 में ‘मदर इंडिया’ की शूटिंग के दौरान एक भयानक हादसा हुआ.
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फिल्म के एक सीन के लिए घास के ढेर में आग लगाई गई थी, जिसमें नरगिस फंस गईं. उन्हें मौत के मुंह में फंसा देख फिल्म में उनके बेटे का किरदार निभा रहे सुनील दत्त बिना अपनी जान की परवाह किए आग में कूद पड़े और उन्हें बाहर निकाल लाए. इस बहादुरी में सुनील दत्त बुरी तरह झुलस गए थे.

अस्पताल में नरगिस ने दिन-रात एक कर सुनील दत्त की सेवा की और इसी देखभाल के दौरान दोनों के बीच प्यार पनपने लगा. नरगिस ने अपनी डायरी में उस पल को याद करते हुए लिखा था कि अगर वह (सुनील) न होते, तो शायद उनकी जिंदगी वहीं खत्म हो गई होती. सुनील ने उनसे बस इतना कहा था कि मैं चाहता हूं कि तुम जिओ.

दोनों ने 11 मार्च 1958 को आर्य समाज रीति-रिवाज से गुपचुप तरीके से शादी कर ली. फिल्म में वे मां-बेटे की भूमिका में थे, इसलिए इस डर से कि कहीं खबर लीक होने पर फिल्म का बिजनेस न बिगड़ जाए, उन्होंने करीब एक साल तक अपनी शादी की बात छिपाए रखी. जब यह राज खुला, तो पूरा बॉलीवुड हैरान रह गया.

इस खबर ने राज कपूर को भीतर तक तोड़ दिया था. कपूर खानदान की बायोग्राफी के अनुसार, राज कपूर कई रातों तक नशे में धुत होकर घर लौटते और बाथटब में गिरकर घंटों रोया करते थे. गम की इंतहा यह थी कि वह जलती हुई सिगरेट से खुद को जलाने लगे थे.

सुनील दत्त के साथ मिलकर नरगिस ने वह सब कुछ हासिल किया जिसकी कमी उन्हें जिंदगी में हमेशा खलती रही थी. उन्होंने अपना एक हंसता-खेलता परिवार बसाया, तीन बच्चों की मां बनीं, अपनी प्रोडक्शन कंपनी शुरू की और समाज सेवा में खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया. साल 1980 में उन्हें राज्यसभा के लिए मनोनीत किया गया.

नरगिस ने बिना किसी पछतावे के स्टारडम को पीछे छोड़ दिया और परिवार की खातिर फिल्मों से लगभग दूरी बना ली. उन्हें करीब से जानने वालों का कहना था कि वह अपनी जिंदगी के उस दौर में सबसे ज्यादा सुकून में थीं. लेकिन इसी दौरान किस्मत ने खतरनाक मोड़ लिया. 1980 में राज्यसभा के एक सत्र के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच में पैनक्रियाटिक कैंसर की पुष्टि हुई.

उस वक्त उनके बेटे संजय दत्त अपनी पहली फिल्म रॉकी से बॉलीवुड में कदम रखने जा रहे थे, जिसकी रिलीज 7 मई 1981 को तय थी. नरगिस ने वादा किया था कि चाहे उन्हें स्ट्रेचर पर ही क्यों न जाना पड़े, वह अपने बेटे की फिल्म की स्क्रीनिंग पर जरूर मौजूद रहेंगी.

उन्होंने इस वादे को निभाने के लिए ढलती उम्र और कैंसर की असहनीय पीड़ा के बीच भी हार नहीं मानी. लेकिन 2 मई 1981 को वह कोमा में चली गईं और अगले ही दिन 3 मई 1981 को उन्होंने आखिरी सांस ली. उनकी मौत के ठीक चार दिन बाद फिल्म रॉकी रिलीज हुई, प्रीमियर के दौरान सुनील दत्त ने अपने बगल वाली सीट खाली रखी थी और वो सीट नरगिस के लिए थी.

