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1949 में आई एक ऐसी फिल्म ने हिंदी सिनेमा का पूरा खेल बदल दिया था, जिसकी कहानी मशहूर लेखक-निर्देशक रामानंद सागर ने लिखी थी. करीब 2 घंटे 51 मिनट लंबी इस फिल्म में 10 गाने थे और उनमें से 9 गानों को एक ही गायिका ने आवाज दी थी उस दौर में जब फिल्मों का करोड़ों कमाना सपना माना जाता था, तब इस मूवी ने 1 करोड़ 10 लाख रुपये की रिकॉर्डतोड़ कमाई कर हर किसी को चौंका दिया. दिलचस्प बात ये है कि इसी फिल्म ने एक सुपरस्टार डायरेक्टर और एक महान गायिका की किस्मत हमेशा के लिए बदल दी थी.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी फिल्म आई थी, जिसने सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर तहलका नहीं मचाया, बल्कि रोमांस, संगीत और कहानी कहने का पूरा अंदाज बदल दिया. करीब ढाई घंटे लंबी इस फिल्म में 10 गाने थे और हैरानी की बात ये कि उनमें से 9 गानों में तो लता मंगेशकर की ने अपनी आवाज दी थी. उस दौर में जब फिल्मों का बिजनेस लाखों में हुआ करता था, तब इस फिल्म ने 1 करोड़ 10 लाख रुपये की कमाई कर इतिहास रच दिया था. आज के हिसाब से यह आंकड़ा लगभग 700 करोड़ रुपये के बराबर माना जाता है. दिलचस्प बात ये भी है कि इसकी कहानी मशहूर फिल्मकार रामानंद सागर ने लिखी थी और निर्देशन की कमान एक ऐसे एक्टर ने संभाली थी, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा शोमैन कहलाया यानी राज कपूर.

बात कर रहे हैं साल 1949 में रिलीज हुई फिल्म ‘बरसात’ की. जो हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार और ऐतिहासिक फिल्मों में से एक है. इस फिल्म ने न सिर्फ राज कपूर को एक बड़े निर्देशक के रूप में स्थापित किया, बल्कि नरगिस के साथ उनकी जोड़ी को अमर बना दिया. टीवी में ‘रामायण’ के साथ घर-घर में पहचान बनाने वाले रामानंद सागर द्वारा लिखी गई यह कहानी आज भी रोमांस, संगीत और भावुकता का पर्याय बनी हुई है.

फिल्म के डायरेक्टर और प्रोड्यूसर कोई और नहीं बल्कि खुद बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर थे. उन्होंने इस फिल्म में नरगिस और प्रेमनाथ के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी. यह एक्ट्रेस निम्मी की पहली फिल्म थी. 76 साल बीत जाने के बाद भी यह फिल्म उतनी ही ताजगी और उमंग के साथ याद की जाती है, जितनी उस वक्त थी.
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फिल्म की कहानी दो दोस्तों प्राण (राज कपूर) और गोपाल (प्रेम नाथ) के इर्द-गिर्द घूमती है. दोनों शहर के अमीर युवक हैं, जो छुट्टियों में पहाड़ी इलाके जाते हैं. वहां प्राण की मुलाकात रेशमा (नरगिस) से होती है, जो एक साधारण पहाड़ी लड़की है. गोपाल की मुलाकात नीला (निम्मी) से होती है. दोनों दोस्तों के चरित्र बिल्कुल विपरीत हैं. प्राण संवेदनशील और सच्चा प्रेमी है, जबकि गोपाल रंगीन मिजाज का है. फिल्म दो मॉनसून के बीच फैली एक साल की कहानी है, जिसमें प्रेम, विश्वासघात, त्याग और दर्द की भावनाएं बखूबी दिखाई गई हैं.

फिल्म की शूटिंग का एक बहुत दिलचस्प पहलू यह है कि राज कपूर ने ‘बरसात’ के कुछ हिस्सों की शूटिंग कश्मीर घाटी में की थी और यह कश्मीर घाटी में शूट होने वाली पहली फिल्म थी. यह बात भी काफी दिलचस्प है कि फिल्म की प्रसिद्ध पोस्टर और पब्लिसिटी का डिज़ाइन उस समय के मास्टर आर्टिस्ट डॉ. एस. एम. पंडित ने बनाया था.

1949 में रिलीज हुई बरसात उस दौर की सबसे बड़ी म्यूजिकल रोमांटिक फिल्मों में गिनी जाती है. फिल्म का संगीत शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने तैयार किया था. गीतकार हसरत जयपुरी और शैलेंद्र थे. यही वह फिल्म थी, जिसने इस मशहूर संगीतकार जोड़ी को रातोंरात स्टार बना दिया. फिल्म के गानों ने लोगों के दिलों में ऐसी जगह बनाई कि दशकों बाद भी उन्हें याद किया जाता है. फिल्म में कुल 10 गाने हैं, जिसमें से 9 तो लता मंगेशकर ने गाए थे. उस समय लता मंगेशकर इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही थीं, लेकिन बरसात के गानों ने उन्हें सीधे स्टार बना दिया. उनकी आवाज में दर्द, मासूमियत और रोमांस का ऐसा मेल था कि लोग मंत्रमुग्ध हो गए. ‘हवा में उड़ता जाए’, ‘बरसात में हमसे मिले तुम सजन’ और ‘जिया बेकरार है’ जैसे गीत आज भी सदाबहार माने जाते हैं.

राज कपूर ने इस फिल्म के जरिए यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक्टर नहीं, बल्कि शानदार निर्देशक भी हैं. बरसात उनकी शुरुआती निर्देशित फिल्मों में से एक थी, लेकिन फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, म्यूजिक और इमोशनल ट्रीटमेंट देखकर किसी को यकीन नहीं हुआ कि इतना युवा निर्देशक इतनी परिपक्व फिल्म बना सकता है. फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसने उस समय 1 करोड़ 10 लाख रुपये का बिजनेस किया था. 1949 के दौर में यह रकम किसी चमत्कार से कम नहीं थी. ट्रेड एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अगर उस कमाई को आज के दौर के हिसाब से देखा जाए तो यह करीब 700 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है. यही वजह है कि बरसात को हिंदी सिनेमा की पहली मेगा ब्लॉकबस्टर फिल्मों में गिना जाता है.

बरसात का असर सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रहा. इस फिल्म ने हिंदी फिल्मों में रोमांस को पेश करने का तरीका बदल दिया. राज कपूर और नरगिस की केमिस्ट्री इतनी लोकप्रिय हुई कि आगे चलकर दोनों की जोड़ी इंडस्ट्री की सबसे आइकॉनिक जोड़ियों में शामिल हो गई. दिलचस्प बात यह भी है कि फिल्म का पोस्टर, जिसमें राज कपूर हाथ में वायलिन लिए नरगिस को थामे नजर आते हैं, बाद में आरके स्टूडियो का स्थायी लोगो बन गया. यानी बरसात सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक ऐसे सिनेमाई युग की शुरुआत थी जिसने आने वाले दशकों तक बॉलीवुड की दिशा तय की.

आज जब हम करीब 75 साल बाद ‘बरसात’ को देखते हैं, तो समझ आता है कि सच्ची कहानी, बेहतरीन संगीत और सच्चे भावनाओं का मेल कितना ताकतवर होता है. आज की फिल्मों में जितने करोड़ रुपये खर्च होते हैं, उस समय सिर्फ दिल से बनी यह फिल्म आज के 700 करोड़ के बराबर कमाई कर गई. यह फिल्म सिर्फ एक रोमांटिक कहानी नहीं, बल्कि एक युग का दस्तावेज है. जब सिनेमा लोगों के दिलों को छूने का माध्यम था, न कि सिर्फ कमाई का. ‘बरसात’ आज भी बारिश के मौसम में सुनाई जाने वाली फिल्मों में शामिल है और नई पीढ़ी के लिए क्लासिक उदाहरण बनी हुई है.

