Raza Murad Rampur Visit: बॉलीवुड की भारी-भरकम आवाज और स्क्रीन पर खूंखार विलेन की छवि रखने वाले दिग्गज अभिनेता रजा मुराद का एक अलग ही रूप उनके पैतृक शहर रामपुर में देखने को मिला. यह केवल एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि साढ़े छह दशकों का एक लंबा इंतजार और यादों की गलियों में वापसी थी. करीब 65 साल बाद जब रजा मुराद अपने बचपन के मोहल्ले ‘जीना इनायत खां’ की हर गली-हर चेहरा उन्हें अतीत में ले गया. मानों वक्त का पहिया जैसे थम सा गया हो. उनकी आंखों में आंसू तब छलक आए जब दशकों बाद किसी ने उन्हें उनके फिल्मी नाम से नहीं, बल्कि बचपन के नाम ‘मुन्ने मियां’ से पुकारा.
‘मुन्ने मियां’ सालों बाद सुना बचपन का नाम
रजा मुराद के लिए रामपुर वापसी का सबसे भावुक पल तब आया, जब पीछे से एक बुजुर्ग महिला की आवाज गूंजी ‘मुन्ने मियां’. यह आवाज सुनकर अभिनेता ठिठक गए और जब पलटकर देखा तो सामने उनकी पुरानी पड़ोसन रेहाना खड़ी थीं. वहीं, पड़ोसन जो उन्हें बचपन में इसी नाम से बुलाती थीं. बचपन के उस नाम ने सालों की दूरी को एक पल में मिटा दिया. 1961 के बाद पहली बार अपने इस पुराने मोहल्ले में पहुंचे रजा मुराद इस कदर भावुक हुए कि उनकी आंखें नम हो गईं और गला भर आया.
उन्होंने बताया कि इस नाम में उनका पूरा बचपन और रामपुर की रूह बसी हुई है. पूरा मुहल्ला उन्हें मुन्ने मियां कहकर बुलाता था इतने सालों बाद वही नाम सुनकर रजा मुराद के चेहरे पर मुस्कान आ गई. उन्होंने कहा कि इस नाम में उनका पूरा बचपन बसा हुआ है.
10 साल की उम्र में छोड़ दिया था रामपुर, 1961 के बाद पहली बार पहुंचे
अपनी पुरानी यादों को साझा करते हुए रजा मुराद ने बताया कि वह महज 10 साल की उम्र में रामपुर छोड़कर मुंबई चले गए थे. वहीं उनकी शिक्षा हुई और फिर फिल्मी दुनिया में कदम रखा. साथ ही, अभिनय की दुनिया में अपना बड़ा मुकाम हासिल किया. हालांकि, वह बीच-बीच में रामपुर आते रहे, लेकिन उन्हें अपने इस पुराने मोहल्ले ‘जीना इनायत खां’ की गलियों में कदम रखने का मौका लगभग 64-65 साल बाद मिला है. इतने लंबे अंतराल के बाद अपनों के बीच लौटना उनके लिए किसी सपने जैसा था.
पुराने दिनों को किया याद, सुनाए दिलचस्प किस्से
रामपुर दौरे के दौरान रजा मुराद ने शहर में घूमकर अपने पुराने दिनों को फिर से महसूस किया लोगों से आत्मीयता से मिले और हर किसी के साथ वक्त बिताया. इस दौरान लोकल18 से खास बातचीत में दिग्गज अभिनेता रजा मुराद ने अपने पुराने दिनों का याद करते हुए कई दिलचस्प और अनसुने किस्से भी सुनाए. उन्होंने बताया कि उनके पिता भी अपने दौर के बड़े अभिनेता थे जिन्होंने 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया था. खास बात ये रही कि उनमें से करीब 300 फिल्मों में उन्होंने जज का किरदार निभाया था.
नवाब का आदेश और पिता का फिल्मी इत्तेफाक
रजा मुराद ने बताया कि रामपुर से उनके परिवार का मुंबई जाना भी किसी इत्तेफाक से कम नहीं था. साल 1938 में उनके पिता ने रामपुर रियासत के नवाब के खिलाफ एक जुलूस निकाला था, जिसके बाद उन्हें 24 घंटे के भीतर शहर छोड़ने का हुक्म (आदेश) मिला. मजबूरी में वो मुंबई पहुंचे. वहां उनकी मुलाकात मशहूर फिल्मकार महबूब खान से हुई. दरअसल, रजा मुराद ने कहा कि उनके पिता को कहानियां लिखने का बहुत शौक था. इसी सिलसिले में वो मशहूर फिल्मकार महबूब खान के पास पहुंचे.
महबूब खान ने उनकी कहानी सुनने और शख्सियत को देखते हुए कहा था, ‘तुम तो शक्ल से बादशाह लगते हो, एक्टर बनोगे?’ यहीं से उनके पिता का फिल्मी करियर शुरू हुआ, जिन्होंने अपने जीवन में 500 से अधिक फिल्में कीं.
संस्कारों की पूंजी और पिता की विरासत
रजा मुरादा ने कहा कि उनके पिता ने उन्हें जो अच्छे संस्कार दिए, वही उनकी असली दौलत है. करीब 586 फिल्मों में अपनी एक्टिंग और दमदार आवाज का लोहा मनवा चुके रजा मुराद आज जो भी हैं, उसका पूरा श्रेय वह अपने पिता को देते हैं. रामपुर की इस यात्रा ने दुनिया के लिए ‘विलेन’ रजा मुराद को एक बार फिर वही मासूम बच्चा ‘मुन्ने मियां’ बना दिया, जिसकी यादें आज भी उन गलियों में सुरक्षित हैं.

