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5 साल पहले नेटफ्लिक्स पर एक अनोखी फिल्म आई थी जिसने लोगों का दिल जीत लिया था. फिल्म का निर्देशन दिग्गज अदाकारा रेणुका शहाणे ने किया था. 3 पीढ़ियों की कहानी वाली फिल्म आज भो लोगों को भावुक कर देती है. इसकी रेटिंग भी काफी कमाल की है.
फिल्म को काफी सराहा गया था.
नई दिल्ली. साल 2021 में रिलीज हुई ‘त्रिभंग’ एक ऐसी फिल्म है, जिसने मां-बेटी के रिश्ते, पारिवारिक जटिलताओं और महिलाओं की स्वतंत्र पहचान जैसे विषयों को बेहद संवेदनशील तरीके से पर्दे पर उतारा. जटिल विषय पर बनी ये फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं को एक अलग तरीके से पेश करती है. नेटफ्लिक्स की इस महिला केंद्रित फिल्म का निर्देशन भी एक महिला ने किया था. रेणुका शहाणे के निर्देशन में बनी ये फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है.
रेणुका कई बार अपने इंटरव्यूज में कह चुकी हैं कि ये फिल्म उनके लिए खास है. काजोल, तन्वी आजमी और मिथिला पालकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आई थीं. नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई इस फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों दोनों से पॉजिटिव रिस्पांस मिला था. फिल्म की कहानी तीन पीढ़ियों की महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है. काजोल ने अनुराधा आप्टे का किरदार निभाया है, जो एक सफल लेकिन गुस्सैल और बेबाक लेखिका है.
मां-बेटी की कहानी ने जीता था दिल
अनुराधा का अपनी मां नयनतारा आप्टे (तन्वी आजमी) के साथ रिश्ता बेहद तनावपूर्ण है. नयनतारा एक प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने अपने सपनों और करियर को हमेशा परिवार से ऊपर रखा. यही वजह है कि अनुराधा बचपन से ही अपनी मां के प्रति नाराजगी और शिकायतें मन में लिए बड़ी हुई है.
रेणुका शहाणे ने किया था कमाल का निर्देशन
कहानी में मोड़ तब आता है, जब नयनतारा को ब्रेन स्ट्रोक हो जाता है और वह अस्पताल में भर्ती हो जाती हैं. इस घटना के बाद अनुराधा को अपनी मां के अतीत, उनके संघर्षों और उनके फैसलों को नए नजरिए से देखने का मौका मिलता है. इसी दौरान दर्शकों को मां-बेटी के रिश्ते की कई परतें देखने को मिलती हैं.
त्रिभंग
ओटीटी पर किया था कब्जा
वहीं, मिथिला पालकर ने अनुराधा की बेटी माशा का किरदार निभाया है. माशा अपनी मां और नानी के बीच पुल का काम करती है. वह आधुनिक सोच वाली युवा लड़की है, जो परिवार के टूटे हुए रिश्तों को समझने और उन्हें जोड़ने की कोशिश करती है. फिल्म में उसकी मौजूदगी कहानी को संतुलन और भावनात्मक गहराई देती है.
‘त्रिभंग’ की सबसे बड़ी खासियत इसकी दमदार परफॉर्मेंस है. काजोल ने एक जटिल और भावनात्मक किरदार को बड़ी सहजता से निभाया है. तन्वी आजमी ने भी अपने किरदार में गहराई और मजबूती दिखाई, जबकि मिथिला पालकर ने युवा पीढ़ी की सोच को प्रभावशाली ढंग से पेश किया.
यह फिल्म सिर्फ एक पारिवारिक ड्रामा नहीं है, बल्कि महिलाओं के उन संघर्षों की कहानी भी है, जिनमें अक्सर करियर, मदरहुड और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है. ‘त्रिभंग’ दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि हर रिश्ते की अपनी सच्चाई होती है और कई बार किसी व्यक्ति को समझने के लिए उसकी पूरी कहानी जानना जरूरी होता है. इस 1घंटे 35 मिनट मिनट की फिल्म को देखकर आपका भावुक होना लाजमी है.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें

