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हिंदी सिनेमा की दिग्गज अदाकारा साधना ने अपने करियर में कई हिट फिल्में और गाने दिए हैं. उनके कुछ गाने तो आज भी लोगों की जहन में बसे हैं. इन्हीं में से एक है, फिल्म ‘वो कौन थी’ का एक ब्लॉकबस्टर गाना. जिसे डायरेक्टर राज खोसला ने सुनते ही रिजेक्ट कर दिया था. लेकिन मनोज कुमार की वजह से वह फिल्म का हिस्सा बना और ब्लॉकबस्टर साबित हुआ. आज यानी 9 जून को निर्देशक राज खोसला की पुण्यतिथि है.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ गाने ऐसे हैं, जो समय के साथ दिल में और ज्यादा जगह बना चुके हैं. ऐसा ही एक गान है, मनोज कुमार और साधना की फिल्म ‘वो कौन थी’ का सुपरहिट गीत ‘लग जा गले’. आज भी ये गाना लोगों के दिलों पर राज करता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि एक समय ऐसा भी था, जब फिल्म के निर्देशक राज खोसला को यह धुन बिल्कुल पसंद नहीं आई थी.

बात तो यहां तक आ गई थीं कि उन्होंने संगीतकार मदन मोहन से कहा था कि तुम ऐसा काम करोगे ये उम्मीद नहीं थी. लेकिन बाद में अभिनेता मनोज कुमार की वजह से यह गीत फिल्म का हिस्सा बन सका और आगे चलकर इतिहास रच गया.

9 जून को राज खोसला की पुण्यतिथि के मौके पर उनके जीवन से जुड़ा यह दिलचस्प किस्सा एक बार फिर चर्चा में है. राज खोसला हिंदी सिनेमा के उन चुनिंदा निर्देशकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने रहस्य, रोमांस और सस्पेंस से भरपूर कई यादगार फिल्में दीं. उनकी फिल्मों की खासियत दमदार कहानी और दर्शकों को अंत तक बांधे रखने वाली प्रस्तुति थी.
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31 मई 1925 को पंजाब में जन्मे राज खोसला ने अपने करियर में कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया. अभिनेत्री साधना के साथ उनकी जोड़ी काफी पसंद की गई. ‘वो कौन थी’, ‘मेरा साया’ और ‘अनीता’ जैसी फिल्में आज भी बेहतरीन सस्पेंस थ्रिलर मानी जाती हैं.

साल 1964 में रिलीज हुई ‘वो कौन थी’ में साधना और मनोज कुमार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे. फिल्म का संगीत मशहूर संगीतकार मदन मोहन ने तैयार किया था. इसी फिल्म में ‘लग जा गले’ गीत भी शामिल था, जिसे लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी.

मदन मोहन के बेटे समीर कोहली ने एक इंटरव्यू में इस गाने से जुड़ा दिलचस्प किस्सा सुनाया था. उनके मुताबिक, जब मदन मोहन ने पहली बार ‘लग जा गले’ की धुन तैयार कर राज खोसला को सुनाई, तो निर्देशक बिल्कुल प्रभावित नहीं हुए. उन्होंने साफ कह दिया कि उन्हें इस तरह की धुन की उम्मीद नहीं थी. राज खोसला को लगा कि यह धुन फिल्म के हिसाब से ठीक नहीं है.

मदन मोहन को अपनी गाने पर पूरा भरोसा था. उन्हें यकीन था कि यह धुन लोगों के दिलों तक जरूर पहुंचेगी. बाद में मनोज कुमार ने एक बार फिर डायरेक्टर को ये गाना सुनने के लिए राजी कर लिया था. लेकिन दोबारा यह धुन सुनाई, तो माहौल ही बदल गया. इस बार राज खोसला ने गाने की खूबसूरती और उसकी भावनात्मक गहराई को महसूस किया. धुन खत्म होते ही उन्हें अपनी पहली राय पर पछतावा हुआ.

बता दें कि बाद में मनोज कुमार ने गर्व से कहा था कि इस गाने को फिल्म में बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका रही थी. वक्त ने भी साबित कर दिया कि उनका फैसला बिल्कुल सही था. आज भी ‘लग जा गले’ भारतीय सिनेमा के यादगार गानों में से एक है. आज भी ये गाना लोगों के जहन में बसा है.

