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बॉक्स ऑफिस पर अजय देवगन का नाम ही सफलता की गारंटी माना जाता है, लेकिन ‘सिंघम’ के इस सुनहरे सफर में कुछ फिल्में ऐसी भी रहीं जो दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतर पाईं. उनके खाते में ऐसी 7 बड़ी फिल्में दर्ज हैं, जिन्हें रिलीज के वक्त सिनेमाघरों में दर्शकों ने पूरी तरह नकार दिया. चौंकाने वाला सच तो यह है कि इस लिस्ट में एक भारी-भरकम बजट वाली फिल्म भी शामिल है जिसे ऑडियंस ने बिल्कुल भी भाव नहीं दिया.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के ‘सिंघम’ यानी अजय देवगन बॉक्स ऑफिस के सबसे बड़े सिकंदर माने जाते हैं, लेकिन उनके शानदार करियर में कुछ ऐसे भी मोड़ आए जब उनकी बड़ी फिल्मों को दर्शकों ने सिरे से नकार दिया. अजय देवगन की ऐसी 7 फिल्में रही हैं, जो थिएटर्स में दर्शकों को रिझाने में पूरी तरह नाकाम रहीं. हैरान करने वाली बात यह है कि इस लिस्ट में एक ऐसी मेगा बजट वाली फिल्म भी शामिल है, जिसकी लागत करीब 200 करोड़ थी, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उसका भी दम निकल गया.

सन ऑफ सरदार 2: यह साल 2012 में आई सुपरहिट फिल्म ‘सन ऑफ सरदार’ का सीक्वल है. विजय कुमार अरोड़ा के निर्देशन में बनी इस कॉमेडी-पारिवारिक फिल्म में जस्सी (अजय देवगन) की कहानी को स्कॉटलैंड के बैकड्रॉप पर आगे बढ़ाया गया था, जहां शादी और पारिवारिक ड्रामे के बीच मजेदार सिचुएशन्स पैदा होती हैं. म्रणाल ठाकुर और रवि किशन जैसे सितारों के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पिट गई. करीब 150 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म भारत में केवल 43.24 करोड़ का ही कलेक्शन कर सकी.

मैदान: यह बायोग्राफिकल स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्म भारतीय फुटबॉल के स्वर्ण युग (1952-1962) और दिग्गज कोच सैयद अब्दुल रहीम के जीवन पर आधारित है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे उन्होंने तमाम बाधाओं और फुटबॉल फेडरेशन की राजनीति से लड़कर एक विश्व स्तरीय भारतीय टीम तैयार की. क्रिटिक्स की जबरदस्त तारीफ के बावजूद करीब 200 करोड़ के भारी-भरकम बजट में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर केवल 52.29 करोड़ का नेट कलेक्शन ही कर सकी और इसे बहुत बड़ा घाटा हुआ.
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औरों में कहां दम था: नीरज पांडे द्वारा निर्देशित यह एक मैच्योर और सस्पेंस से भरी रोमांटिक ड्रामा फिल्म है. इसकी कहानी दो प्रेमियों, कृष्णा (अजय देवगन) और वसुधा (तबू) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो परिस्थितियों के कारण अलग हो जाते हैं क्योंकि कृष्णा को एक मर्डर केस में 22 साल की जेल हो जाती है. फिल्म का प्लॉट दर्शकों को थिएटर्स तक खींचने में पूरी तरह नाकाम रहा. 100 करोड़ से ऊपर के बजट में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर महज 8.59 करोड़ पर सिमट कर डिजास्टर साबित हुई.

थैंक गॉड: यह एक फैंटेसी-कॉमेडी फिल्म है, जिसकी कहानी एक अहंकारी रियल एस्टेट ब्रोकर अयान (सिद्धार्थ मल्होत्रा) के बारे में है, जो एक कार एक्सीडेंट के बाद जीवन और मृत्यु के बीच फंस जाता है. यमलोक में उसका सामना चित्रगुप्त (अजय देवगन) से होता है, जो उसके पाप-पुण्य का हिसाब करने के लिए गेम ऑफ लाइफ खेलते हैं. गंभीर संदेश को कॉमेडी में लपेटने की यह कोशिश दर्शकों को पसंद नहीं आई. करीब 75 करोड़ के बजट वाली यह फिल्म सिर्फ 34.89 करोड़ ही कमा सकी.

रनवे 34: अजय देवगन के निर्देशन में बनी यह एक एविएशन थ्रिलर फिल्म है, जो एक सच्ची घटना से प्रेरित है. कहानी कैप्टन विक्रांत खन्ना (अजय देवगन) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो खराब मौसम में सूझबूझ से फ्लाइट को क्रैश होने से तो बचा लेता है, लेकिन बाद में उस पर कानूनी और विभागीय जांच बैठ जाती है. अमिताभ बच्चन के साथ कोर्टरूम ड्रामा भी फिल्म को नहीं बचा सका. लगभग 100 करोड़ के बजट में तैयार यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सिर्फ 32.96 करोड़ जुटा पाई.

एक्शन जैक्सन: प्रभुदेवा के निर्देशन में बनी यह एक फुल-ऑन मसाला एक्शन फिल्म है. फिल्म की कहानी एक छोटे-मोटे गुंडे वीशी और उसके हमशक्ल थाईलैंड के खूंखार हिटमैन एजे (अजय देवगन दोनों रोल में) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक क्रूर माफिया डॉन के चंगुल से अपनी जान और प्यार को बचाने की कोशिश करते हैं. कमजोर स्क्रीनप्ले और लाउड कॉमेडी के कारण दर्शकों ने इसे नकार दिया. करीब 75 करोड़ के बजट वाली यह फिल्म महज 57 करोड़ ही बटोर सकी थी.

सत्याग्रह: प्रकाश झा के डायरेक्शन में बनी यह एक पॉलिटिकल-ड्रामा फिल्म है. इसका प्लॉट भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़े जन आंदोलन पर आधारित है, जहां एक कॉरपोरेट कारोबारी मानव (अजय देवगन) अपने भाई की मौत के बाद एक आदर्शवादी बुजुर्ग (अमिताभ बच्चन) के साथ मिलकर भ्रष्ट व्यवस्था और राजनेताओं के खिलाफ जंग छेड़ देता है. भारी-भरकम स्टारकास्ट के बावजूद फिल्म की कहानी दर्शकों को बोर कर गई. 70 करोड़ के बजट में बनी यह फिल्म केवल 63.74 करोड़ का कलेक्शन कर पाई थी.

