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हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री रहीं नूतन की आज 90वीं जयंती है. मिस इंडिया का खिताब जीतने के बावजूद नूतन को अपने लुक्स को लेकर ताने सुनने पड़े और उन्होंने मुगल-ए-आजम जैसी बड़ी फिल्म भी ठुकरा दी. लेकिन फिल्म सीमा ने उनकी किस्मत बदल दी और वह बॉलीवुड की सबसे सम्मानित अभिनेत्रियों में शामिल हो गईं. देवानंद, राज कपूर और अमिताभ बच्चन जैसे सितारों के साथ काम करते हुए नूतन ने सादगी, प्रतिभा और मेहनत से नया इतिहास रचा. उनकी फिल्म सौदागर ऑस्कर तक पहुंची और उन्हें अमर बना गई.

कश्मीर के खूबसूरत बरामदे में बारिश की बूंदें जमीन पर गिर रही थीं. समीर चाय के कप में उंगली लपेटे सिमरन के करीब बैठा था. उसने धीरे से कहा, ‘सिमरन, आज नूतन का 90वां जन्मदिन होता, अगर वो होतीं तो. सादगी की उस मूरत ने बॉलीवुड में वो मुकाम हासिल किया, जिसके बारे में सोचकर ही रूह कांप जाती है. जिसे लोग ताने देते थे, उसने अपनी मेहनत से इतिहास बना दिया.’ सिमरन ने उसके हाथ को छूते हुए कहा, ‘बता न, मुझे भी सुनने दे उसकी जिंदगी की हर वो बात, जो किताबों में नहीं लिखी.’ समीर ने आसमान की तरफ देखा और कहानी शुरू कर दी.

समीर ने कहा, ‘यकीन मानेगी नहीं, लेकिन जिस नूतुन को पूरी इंडस्ट्री सादगी की देवी मानती थी, वो इंडस्ट्री की पहली एक्ट्रेस थीं जिन्होंने मिस इंडिया का खिताब जीता था.’ यह सुनते ही सिमरन की आंखें खुली की खुली रह गईं. वह बोली, ‘क्या सच में? मतलब, लुक्स की क्वीन होने के बाद भी उन्हें ताने सुनने पड़े?’ उसके मन में सवाल था कि इतनी खूबसूरत होते हुए भी आखिर लोग उनका मजाक क्यों उड़ाते थे. समीर ने गंभीर होकर कहा, ‘हां, उनके लुक्स को लेकर लोग बहुत कुछ कहते थे, लेकिन नूतन ने कभी हार नहीं मानी.’

सिमरन ने कहा, ‘जी हां समीर. असल में उनके लुक्स को लेकर लोग बहुत कुछ बकते थे. इतना की उनका कॉन्फिडेंस हिल गया, और उन्होंने मुगल-ए-आजम जैसी फिल्म को भी रिजेक्ट कर दिया था.’ समीर चौंक गया. वह बोला, ‘अरे वाह. राज कपूर, अमिताभ, सुनील दत्त जैसे दिग्गजों के साथ काम करने वाली नूतुन ने वो फिल्म ठुकरा दी? फिर किस फिल्म ने उन्हें बचाया?’ सिमरन ने कहा कि उनका कॉन्फिडेंस डगमगा गया था, लेकिन असली टेलेंट को छुपाया नहीं जा सकता. एक फिल्म ने उनकी जिंदगी पलट कर रख दी.
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समीर ने गर्व से कहा, ‘1955 में आई सीमा ने उसकी जिंदगी बदल दी. भाई, ऐसा एक्टिंग की की उनका पहला फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड पक्का था.’ सिमरन हंसते हुए बोली, ‘तो ये वो मोड़ है जहां से नूतन स्टार बन गई? और फिर तो सुजाता आई न. सुनील दत्त के साथ, जो क्लासिक फिल्म मानी जाती है?’ समीर ने सिर हिलाया. उसने कहा कि सीमा ने न केवल नूतन को पहचान दिलाई, बल्कि यह साबित कर दिया कि असली हुनर को ताने दबा नहीं सकते. यह फिल्म नूतन के करियर का टर्निंग प्वाइंट थी.

सिमरन ने उत्साह से कहा, ‘बिल्कुल. देवानंद के साथ पेइंग गेस्ट, राज कपूर के साथ अनाड़ी, छलिया, सोने की चिड़िया. उसने हर हीरो को अपनी एक्टिंग से मात दी.’ समीर ने कहा, ‘और सबसे मजेदार बात ये है कि इतने सारे सितारों के बीच रहकर भी वो सादगी की मूरत बनी रही. स्टारडम उसे कभी छू नहीं पाया.’ उन दोनों ने महसूस किया कि आज की दुनिया में स्टारडम इंसान को बदल देता है, लेकिन नूतन वही रहीं जो थीं. उन्होंने नाम कमाया, लेकिन अपनी जमीन नहीं छोड़ी.

समीर ने रहस्यमयी अंदाज में कहा, ‘अब सुन, सबसे क्लास वाली बात. उसने 1959 में नेवी कमांडर रजनीश बहल से शादी की.’ सिमरन ने तुरंत टोकते हुए कहा, ‘अरे, उस जमाने में शादी के बाद एक्ट्रेसें तो फिल्में छोड़ देती थीं. नूतन ने क्या किया?’ समीर मुस्कराया. उसे सिमरन का यह सवाल पसंद आया. उसने कहा कि यही तो असली ट्विस्ट है. जहां दूसरियां अपना करियर खत्म मान लेती थीं, वहां नूतन ने नियम तोड़ दिए. वह शादी के बाद भी उतनी ही एक्टिव रहीं, बल्कि पहले से ज्यादा दमदार फिल्में कीं.

सिमरन ने कहा, ‘उसने एक्टिंग नहीं छोड़ी. मिलन हो, मैं तुलसी तेरे आंगन की. हर फिल्म में उसने धमाल मचाया. मैं तुलसी. के लिए तो दूसरा फिल्मफेयर भी आया.’ समीर ने ताली बजाते हुए कहा, ‘वाह. पद्मश्री भी मिला, 70 से ज्यादा फिल्में कीं, और नाम कमाया. पर सिमरन, वो एक फिल्म थी सौदागर, जिसने पूरी दुनिया में उसकी धाक जमा दी.’ दोनों इस बात पर सहमत थे कि नूतन ने यह साबित कर दिया कि शादी और परिवार के बाद भी एक महिला अपने सपने जी सकती है. वह सच में एक मिसाल थीं.

समीर ने उत्साह से कहा, ‘हां, 1973 की फिल्म सौदागर. अमिताभ बच्चन और पद्मा खन्ना के साथ. नूतन ने उसमें ऐसा रोल किया की इतिहास रच दिया.’ सिमरन ने तुरंत कहा, ‘रुक, मुझे बता रही हू. ये वही फिल्म थी न जो 46वें ऑस्कर अवॉर्ड्स के लिए सेलेक्ट हुई थी? हालांकि नॉमिनेशन नहीं मिला, लेकिन उस जमाने में ये बड़ी बात थी.’ उनकी आंखों में चमक थी. एक भारतीय फिल्म का ऑस्कर तक पहुंचना उस दौर में बहुत बड़ी उपलब्धि थी. नूतन ने यह कर दिखाया. उनकी इस फिल्म ने भारत का नाम दुनिया के सामने रोशन किया.

सिमरन की आवाज भारी हो गई. उसने कहा, ‘लेकिन समीर, जिंदगी का ये सिलसिला. 21 फरवरी 1991 को वो हमेशा के लिए चलीं गईं.’ समीर ने गमगीन होकर कहा, ‘हां, पर उसने पीछे ऐसी विरासत छोड़ी, जिसकी मिसाल आज तक नहीं मिलती. राज कपूर हो या अमिताभ, सब उसके आगे झुकते थे.’ दोनों कुछ देर चुप रहे. बारिश की फुहारें अब धीमी पड़ चुकी थीं. उन्होंने महसूस किया कि इंसान भले ही इस दुनिया से चला जाए, लेकिन उसके काम और उसकी कला उसे हमेशा जिंदा रखती है. नूतन आज भी जिंदा हैं.

समीर ने कहा, ‘यार, सबसे खास बात ये है कि उसने ताने सुने, मगर अपने अंदाज में उनका जवाब दिया. बिना शोर किए, सिर्फ अपनी एक्टिंग से.’ सिमरन ने कहा, ‘सच कह रहा है. वो साबित कर गई कि सादगी में भी इतना दम होता है कि ऑस्कर तक नाम रोशन कर सके. काश आज की एक्ट्रेसेस उससे सीख लें.’ उन्हें लगा कि आज के समय में लोग मिनटों में स्टार बन जाते हैं, लेकिन नूतन जैसी क्लास और सादगी कहीं खो गई है. वह हर उस इंसान के लिए प्रेरणा थीं, जो अपने रूप-रंग को लेकर कॉम्प्लेक्स में जीता है.

बारिश पूरी तरह रुक चुकी थी. सिमरन ने समीर के हाथ पर हाथ रखते हुए कहा, ‘समीर, सच में नूतन सर ने साबित कर दिया कि कॉन्फिडेंस खो दो, तो मुगल-ए-आजम छूटता है, लेकिन अगर हौसला रखो, तो सौदागर जैसी फिल्म ऑस्कर तक ले जाती है. हैप्पी 90थ बर्थडे, नूतन जी. तुमने सच में सादगी का चेहरा बदल दिया.’ समीर मुस्कुराया और बोला, ‘सिमरन, यही तो असली स्टारडम है. जहां आज भी लोग याद करते हैं, और कल भी करते रहेंगे.’ दोनों ने चुपचाप नूतन की तस्वीर को नम आंखों से सलाम किया और कहानी खत्म हुई.

