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‘कभी नहीं देखे उनके नखरे’, गोरखपुर में जब माधुरी दीक्षित की झलक पाने पहुंची भारी भीड़, रवि किशन ने बताया किस्सा

नई दिल्ली. रवि किशन की फिल्म ‘मां बहन’ नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है. इस मूवी में 90 के दशक की स्टार हीरोइन माधुरी दीक्षित लीड रोल में हैं, जबकि उनके साथ तृप्ति डिमरी और धारणा दुर्गा भी अहम किरदारों में हैं. हाल ही में रवि किशन ने सेट पर माधुरी दीक्षित के साथ काम करने का अपना अनुभव शेयर किया. उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान कई बार सेट पर काफी अफरा-तफरी का माहौल हो जाता था, लेकिन ऐसे तनावपूर्ण माहौल में भी माधुरी दीक्षित गजब का धैर्य रखती थीं.

रवि किशन ने उनकी तारीफ करते हुए कहा कि सेट पर चाहे जितनी भी गड़बड़ी या हंगामा हो, माधुरी हमेशा एकदम शांत और कूल बनी रहती थीं, जो कि वाकई सीखने लायक है. एनडीटीवी से बातचीत में रवि किशन ने खुलकर बात की और माना कि माधुरी दीक्षित जैसी दिग्गज एक्ट्रेस के सामने परफॉर्म करते वक्त वह अंदर से काफी नर्वस थे. उन्होंने बताया कि फिल्म में माधुरी के साथ उनके जितने भी सीन हैं, वो इमोशन्स से भरपूर और काफी इंटेंस हैं.

‘मां बहन’ में कैसा है माधुरी दीक्षित का रोल?

अपने किरदार पर बात करते हुए रवि किशन ने कहा कि उन्होंने अपने पूरे करियर में ऐसा रोल पहले कभी नहीं निभाया है, यह उनके लिए बिल्कुल नया तजुर्बा था. सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने एक बड़ा सस्पेंस खोलते हुए यह भी बताया कि इस फिल्म में माधुरी का किरदार भी बेहद अनोखा है. दर्शकों ने उन्हें पर्दे पर आज तक जिस भी रूप में देखा है, यह उससे बिल्कुल अलग और एकदम हटके होने वाला है.

हर माहौल में खुद को शांत रखती हैं माधुरी दीक्षित

माधुरी दीक्षित कैसे खुद को एकदम शांत रखती हैं, इस पर बात करते हुए रवि किशन ने बड़े ही मजेदार अंदाज में कहा, ‘माधुरी मैम की जिंदगी में जैसे कोई टेंशन ही नहीं है. सेट पर चाहे तेज बारिश हो रही हो या चारों तरफ कीचड़ फैला हो, मैंने आज तक उन्हें कभी नखरे दिखाते नहीं देखा. बारिश कम हो या ज्यादा, वह अपनी ही धुन में खुश रहती हैं. शूटिंग के बीच में लाइट चली जाए, तो भी वह मुस्कुराती रहती हैं. अगर मेरी वजह से सेट पर थोड़ी देर भी हो जाए और सबको इंतजार करना पड़े, तब भी उनके चेहरे पर शिकन नहीं आती.

रवि किशन ने माधुरी दीक्षित संग काम करने का बताया अनुभव

इतना ही नहीं, रिहर्सल के दौरान अगर मैं अपनी तरफ से कोई एक्स्ट्रा लाइन भी जोड़ देता हूं, तो उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती, वह बस प्यार से मुस्कुरा देती हैं. सच कहूं तो उन्होंने अपने आस-पास एक बेहद खूबसूरत दुनिया बना रखी है. वह उसी दुनिया में मगन रहती हैं. सेट पर चाहे जितनी भी अफरा-तफरी मची हो या कोई भी गड़बड़ी हो जाए, वह सबकी बात आराम से सुनती हैं और बस ओह हां, हां कहकर मुस्कुरा देती हैं.

रवि किशन ने बताया गोरखपुर का किस्सा

रवि किशन ने एक दिलचस्प पुराना किस्सा बताया कि एक बार वह और माधुरी दीक्षित ब्रैंड एंबेसडर के तौर पर गोरखपुर में एक ज्वेलरी स्टोर के उद्घाटन के लिए गए थे. वहां एक्ट्रेस की एक झलक पाने के लिए ऐसी दीवानगी दिखी कि पूरा शहर थम गया था, जिसे देखकर खुद रवि किशन की सांसें अटक गई थीं, लेकिन माधुरी जी बिल्कुल शांत थीं. रवि किशन ने कहा, ‘उस दिन सड़क पर पैर रखने तक की जगह नहीं थी, मानो पूरा शहर ही सड़कों पर उतर आया हो. लोग उन्हें देखने के लिए पेड़ों और दीवारों पर चढ़े हुए थे. कॉलेज की लड़कियां और आज की जनरेशन तो उत्साह के मारे कूदने को तैयार बैठी थी. मैं उनकी सुरक्षा को लेकर अंदर से बेहद डरा हुआ और परेशान था कि कहीं कोई गड़बड़ न हो जाए, लेकिन माधुरी मैम को इस बात की रत्ती भर भी फिक्र नहीं थी. वह इस भारी भीड़ के बीच भी बिना किसी डर या घबराहट के चेहरे पर वही अपनी जादुई मुस्कान बिखेरती रहीं.’

क्या है ‘मां बहन’ की कहानी?

बताते चलें कि ‘मां बहन’ फिल्म का प्लॉट मां और उसकी दो बेटियों के इर्द-गिर्द घूमता है. कहानी में असली भूचाल तब आता है, जब एक दिन अचानक इन्हें अपनी ही रसोई में एक अनजान लाश मिलती है. इसके बाद शुरू होता है इस क्राइम को छुपाने का वो खेल, जो इन्हें एक बेहद अजीब और मजेदार मुसीबत में डाल देता है. पूरी फिल्म इसी बात पर टिकी है कि कैसे ये तीनों इस मरे हुए इंसान को ठिकाने लगाने की जुगत भिड़ाती हैं और इस चक्कर में उनके आस-पास क्या-क्या ड्रामा और रायता फैलता है.

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