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बॉलीवुड की वो अमर प्रेम कहानी जो अधूरी रहकर भी मुकम्मल हो गई. आज दशकों बाद भी लोगों की जुबां पर हिंदी सिनेमा के इस कपल का नाम चढ़ा हुआ जिसने एक दशक तक साथ रहने के बाद अपनी राहें अलग कर ली और दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए. ये कपल नरगिस और राज कपूर है. दोनों का रिश्ता जग-जाहिर था. शादीशुदा होते हुए भी राज कपूर ने अपने घर में नरगिस की यादों का एक कमरा बना रखा था जिसे उन्होंने आखिरी दम तक सहेज कर रखा था.

नई दिल्ली.16 साल की नरगिस की मुलाकात एक ऐसे फिल्ममेकर से हुई जो अपनी फिल्म कंपनी की शुरुआत कर ही रहा था. राज कपूर करीब 22 साल की उम्र के आस-पास रहे होंगे जब वो अपना आरके स्टूडियोज खड़ा कर ही रहे थे. एक तरफ नया नवेला फिल्ममेकर था जो इंडस्ट्री में अपना पांव जमाने की कोशिश कर रहा था. वहीं दूसरी तरफ 16 साल की उम्र में इंडस्ट्री में पहचान बना चुकीं सबसे नामचीन हीरोइनों में शुमार नरगिस थीं.

हिंदी सिनेमा की इस अधूरी प्रेम कहानी की शुरुआत साल 1948 में हुई जब राज कपूर और नरगिस ने पहली बार फिल्म आग में साथ काम किया था. आग में नरगिस औऱ राज कपूर ने लीड रोल अदा किया था और इसके साथ ही फिल्म के निर्देशन की कमान भी राज कपूर ने ही संभाली थी. इस फिल्म से उन्होंने बतौर निर्देशक अपने करियर की नई पारी का आगाज किया था.

1948 में आई फिल्म आग से राज कपूर ने निर्देशन की शुरुआत की थी और यहीं से दोनों की प्रेम कहानी का आगाज भी हुआ था. इस फिल्म से नरगिस के स्टारडम में चार चांद लग गए और वो रातों रात और भी मशहूर हो गईं. इस फिल्म के सेट से दोनों की प्रेम कहानी की शुरुआत हुई लेकिन यहीं से नरगिस के करियर का अंत होने लगा. धीरे-धीरे नंबर 1 हीरोइनों में शुमार अदाकारा की दुनिया आरके स्टूडियो तक सिमट कर रह गई.
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नरगिस सिर्फ राज कपूर द्वारा निर्देशित फिल्मों में काम करने लगीं जिसकी वजह से अन्य फिल्ममेकर्स का उनतक पहुंच पाना भी मुश्किल होता चला गया. अगर कोई निर्देशक या निर्माता नरगिस को फिल्म ऑफर करना भी चाहता तो राज कपूर उसके लिए मुश्किलें खड़ी कर देते थे. धीरे-धीरे वक्त के साथ ऐसी नौबत आ गई कि नरगिस के साथ फिल्में बनाने के लिए मेकर्स को राज कपूर से इजाजत लेनी पड़ती थी.

एक तरफ नरगिस की आंखों के सामने उनका करियर तबाह हो रहा था, तो दूसरी तरफ ख्वाबों में बसाई उनकी दुनिया का सच उनके सामने आने लगा था. 10 साल के इंतजार के बाद आखिरकार नरगिस को एहसास हुआ कि राज कपूर अपनी पत्नी कृष्णा राज कपूर से कभी तलाक नहीं लेंगे और उन दोनों का रिश्ता सिर्फ उनके ख्वाबों का हिस्सा है, हकीकत नहीं.

अपनी सपनों की दुनिया से बाहर निकलते ही नरगिस ने राज कपूर और आरके स्टूडियोज का हाथ झटक दिया. वो अपनी जिंदगी और करियर में आगे बढ़ गईं. राज कपूर से रिश्ता खत्म होने के बाद ही नरगिस को ‘मदर इंडिया’ का ऑफर मिला था जिसके सेट पर उनकी मुलाकात सुनील दत्त से हुई.

‘मदर इंडिया’ के सेट पर आग लग गई थी और सुनील दत्त ने अपनी जान जोखिम में डाल बिना परवाह किए नरगिस की जान बचाई थी. ‘मदर इंडिया‘ के सेट पर सुनील दत्त और नरगिस के रिश्ते की शुरुआत हुई, लेकिन फिल्म की रिलीज तक दोनों ने अपने रिश्ते की किसी को भनक भी नहीं लगने दी.

कुछ समय की जान-पहचान में नरगिस को एहसास हुआ कि वो सुनील दत्त से शादी करना चाहती हैं. किश्वर देसाई ने अपनी किताब ‘डार्लिंग जी’ में लिखा है कि सुनील दत्त के साथ नरगिस सुरक्षित महसूस करती थीं. उन्होंने राज कपूर के साथ अपने रिश्ते को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती और एक बुरा सपना बताया था. किताब के अनुसार नरगिस ने यहां तक कहा था कि वो राज कपूर से प्यार करती थीं जबकि डायरेक्टर की तरफ से सिर्फ आकर्षण था जिसे उन्होंने अपने करियर और जिंदगी की कीमत से चुकाया. नरगिस ने राज कपूर के साथ सारे रिश्ते खत्म करते हुए 1958 में सुनील दत्त से शादी कर ली थी.

