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गुरु दत्त के असिस्टेंट बन की शुरुआत, 1 फिल्म से बदल डाली आशा पारेख की छवि, दे डालीं कई कालजयी फिल्में

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हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक राज खोसला सिर्फ बेहतरीन फिल्में बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि कलाकारों की छिपी प्रतिभा को पहचानने के लिए भी जाने जाते थे. अभिनेत्री आशा पारेख के करियर में उनका योगदान इसका सबसे बड़ा उदाहरण माना जाता है. एक दौर में आशा पारेख को केवल ग्लैमरस और डांसिंग स्टार के रूप में देखा जाता था, लेकिन राज खोसला ने उन पर भरोसा जताते हुए फिल्म ‘दो बदन’ में एक गंभीर और भावनात्मक भूमिका दी.

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गुरु दत्त के असिस्टेंट बन की शुरुआत, 1 फिल्म से बदल डाली आशा पारेख की छविZoom

आशा पारेख की फिल्में सुपरहिट रही हैं.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ निर्देशक ऐसे रहे हैं, जिन्होंने सिर्फ सफल फिल्में ही नहीं दीं, बल्कि कलाकारों के करियर को भी नई दिशा दी. ऐसे ही दूरदर्शी फिल्मकारों में राज खोसला का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. 31 मई 1925 को जन्मे राज खोसला ने अपने निर्देशन करियर में कई यादगार फिल्में बनाई और अनेक कलाकारों की प्रतिभा को नए आयाम दिए. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक अभिनेत्री आशा पारेख की छवि को बदलना भी माना जाता है.

1960 के दशक में आशा पारेख हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाती थीं. उनकी खूबसूरती, डांस और चुलबुले किरदार दर्शकों को खूब पसंद आते थे. हालांकि, उस समय फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें मुख्य रूप से एक ग्लैमरस स्टार के तौर पर देखा जाता था. कई लोगों का मानना था कि वह हल्के-फुल्के और मनोरंजक किरदारों तक ही सीमित हैं. गंभीर और भावनात्मक भूमिकाओं में उनकी क्षमता को लेकर अक्सर संदेह जताया जाता था.

आशा पारेख की बदली छवि

राज खोसला उन निर्देशकों में से थे, जो कलाकारों की छिपी संभावनाओं को पहचानने का हुनर रखते थे. उन्होंने आशा पारेख में वह प्रतिभा देखी, जिसे शायद उस दौर में बहुत कम लोग समझ पाए थे. इसी विश्वास के साथ उन्होंने वर्ष 1966 में रिलीज हुई फिल्म ‘दो बदन’ में आशा पारेख को एक ऐसा किरदार दिया, जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी.

फिल्म में आशा पारेख ने भावनात्मक और संवेदनशील भूमिका निभाई, जिसे दर्शकों और क्रिटिक्स दोनों ने सराहा. इस फिल्म की सफलता ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ ग्लैमरस भूमिकाओं तक सीमित एक्ट्रेस नहीं हैं, बल्कि चैलेंजिंग किरदारों को भी प्रभावशाली ढंग से निभा सकती हैं. ‘दो बदन’ के बाद आशा पारेख को लेकर इंडस्ट्री की सोच बदलने लगी और उन्हें गंभीर भूमिकाओं के लिए भी देखा जाने लगा.

राज खोसला संग आशा पारेख ने दी कई सुपरहिट फिल्में

बाद में राज खोसला और आशा पारेख की जोड़ी ने कई अन्य फिल्मों में भी साथ काम किया. ‘चिराग’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों ने इसको और मजबूत बनाया. विशेष रूप से ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ को हिंदी सिनेमा की क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है. इस फिल्म में रिश्तों, त्याग और आत्मसम्मान जैसे विषयों को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया था और इसमें आशा पारेख के अभिनय को भी खूब सराहना मिली.

राज खोसला की सबसे बड़ी विशेषता यही थी कि वह अपने कलाकारों को सिर्फ स्टारडम के नजरिए से नहीं देखते थे. वह उनके भीतर मौजूद अभिनेता को पहचानने और उसे निखारने में विश्वास रखते थे. यही कारण है कि उनके निर्देशन में कई कलाकारों ने अपने करियर के यादगार प्रदर्शन दिए.

मशहूर फिल्मकार गुरुदत्त के सहायक निर्देशक के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी. राज खोसला ने आगे चलकर हिंदी सिनेमा को कई कालजयी फिल्में दीं. ‘सीआईडी’, ‘वो कौन थी?’, ‘मेरा साया’, ‘दो रास्ते’, ‘मेरा गांव मेरा देश’, ‘दोस्ताना’ और ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ जैसी फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित निर्देशकों की श्रेणी में ला खड़ा किया.

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Pranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें

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