Protool

Suman Kalyanpur Death Reason: सुमन कल्याणपुर का कैसे हुआ निधन? सामने आई सिंगर की मौत की वजह

Last Updated:

‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ जैसे सदाबहार गानों को अपनी आवाज देने वाली दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम मुंबई में निधन हो गया. 89 साल की उम्र में उन्होंने लोखंडवाला स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली. पद्म भूषण से सम्मानित सिंगर के जाने से संगीत जगत और उनके फैंस में शोक की लहर है. करीबी दोस्त ने बताया कि सुमन कल्याणपुर ने शांतिपूर्ण तरीके से दुनिया को अलविदा कहा. अपने आखिरी दिनों में वह लगातार खुद के ही गाए गानों को सुन रही थीं.

ख़बरें फटाफट

सुमन कल्याणपुर का कैसे हुआ निधन? सामने आई सिंगर की मौत की वजहZoom

सुमन कल्याणपुर का 89 साल की उम्र में मुंबई में निधन हुआ.

नई दिल्ली. दिग्गज गायिका सुमन कल्याणपुर का रविवार शाम निधन हो गया. उन्होंने ‘ना ना करते प्यार तुम्हीं से’ और ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’ जैसे ना जाने कितने सदाबहार गानों को अपनी आवाज से सजाया था. 1960 और 70 के दशक में सुमन कल्याणपुर की सुरीली आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलता था. उस दौर में जब स्वर कोकिला लता मंगेशकर का पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर दबदबा था, तब सुमन ने अपनी बेहतरीन गायकी के दम पर न सिर्फ अपनी एक अलग पहचान बनाई, बल्कि इंडस्ट्री में अपना एक खास मुकाम भी हासिल किया. उनके निधन से इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ पड़ी है. इस बीच सुमन कल्याणपुर की मौत की वजह सामने आई है.

सुमन कल्याणपुर बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं. इस वजह से रविवार शाम उनके लोखंडवाला स्थित आवास पर निधन हुआ. उनकी एक करीबी दोस्त ने इस दुखद खबर की पुष्टि की है. उन्होंने बताया कि सुमन अपने जीवन के आखिरी वक्त में अपने पुरानों को बड़े चांव से सुना करती थीं.

किस वजह से हुआ सुमन कल्याणपुर का निधन?

गायिका सुमन कल्याणपुर की मराठी जीवनी ‘सुमन सुगंध’ लिखने वालीं उनकी बेहद करीबी दोस्त मंगला खाडिलकर ने पीटीआई से बातचीत में बताया, ‘बढ़ती उम्र की दिक्कतों के चलते सुमन का निधन रविवार रात करीब 8 बजे उनके लोखंडवाला वाले घर पर बेहद शांतिपूर्ण तरीके से हुआ. अपने आखिरी दिनों में वह लगातार खुद के गाए हुए पुराने गानों को सुन रही थीं और उन्हीं यादों के साथ उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया.’

सुमन कल्याणपुर ने कई भाषाओं में गाए गाने

सुमन कल्याणपुर अपने पीछे 6 दशकों से भी लंबा और बेहद समृद्ध संगीतमय सफर छोड़ गई हैं. अपनी सुरीली आवाज और शास्त्रीय गायकी की समझ के दम पर उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग की दुनिया में अपनी एक बिल्कुल अलग पहचान बनाई थी. सुमन कल्याणपुर का संगीत का दायरा बेहद व्यापक था. उन्होंने सिर्फ हिंदी और मराठी ही नहीं, बल्कि असमी, कन्नड़, बंगाली और ओडिया समेत कई प्रादेशिक भाषाओं में भी गाने रिकॉर्ड किए. फिल्मी गीतों के अलावा उन्होंने भक्ति संगीत (भजन), गजल और ठुमरी को भी अपनी सुरीली आवाज से सजाया, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है.

सुमन कल्याणपुर ने मराठी में क्लासिक गाने दिए

उन्होंने कई सदाबहार और यादगार गाने फिल्म इंडस्ट्री को दिए. सिर्फ हिंदी ही नहीं, बल्कि मराठी संगीत में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा. उनके गाए मराठी क्लासिक्स जैसे ‘केतकीच्या बनी तिथे’, ‘सांग कधी कळणार तुला’ और ‘लिंबोणीच्या झाडामागे’ आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर चढ़े हुए हैं और पीढ़ियों से पसंद किए जा रहे हैं.

सुमन कल्याणपुर को पद्म भूषण से किया था सम्मानित

पद्म भूषण से सम्मानित सुमन कल्याणपुर ने हिंदी और मराठी के साथ-साथ कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी अपनी जादुई आवाज का हुनर बिखेरा. उनकी गायकी की सबसे बड़ी खूबी आवाज की पाकीजगी और उसकी गहराई थी, जिसने लाखों दिलों को अपना मुरीद बना लिया. अखंड भारत के ढाका में जन्मीं और बाद में मुंबई को अपना बसेरा बनाने वाली सुमन कल्याणपुर अपने दौर की सबसे प्रतिष्ठित और सम्मानित प्लेबैक सिंगर्स में शुमार थीं.

About the Author

authorimg

Kamta PrasadSenior Sub Editor

कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें



Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *