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कोर्टरूम ड्रामा एक ऐसा जॉनर है, जिसमें दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखने की कमाल की काबिलियत होती है. बंद कोर्टरूम में तीखी बहस, चौंकाने वाले सबूत, वकीलों का तीखा रवैया और इंसाफ के लिए कभी न खत्म होने वाली लड़ाई स्क्रीन पर एक अनोखा रोमांच पैदा करती है. बॉलीवुड ने कई बेहतरीन फिल्में बनाई हैं, जो न सिर्फ कानूनी प्रक्रियाओं को दिखाती हैं बल्कि समाज की कड़वी सच्चाई और सिस्टम की कमियों को भी सामने लाती हैं. अगर आप सस्पेंस, थ्रिलर और माइंड गेम्स से भरी फिल्मों के फैन हैं, तो हम आपके लिए ऐसी 6 बेहतरीन कोर्टरूम ड्रामा फिल्में लाए हैं जो आपको एक भी सीन मिस करने से पहले 10 बार सोचने पर मजबूर कर देंगी, क्योंकि उनका क्लाइमैक्स आपके होश उड़ा देगा.

नई दिल्ली. जब कोई वकील सिल्वर स्क्रीन पर धीमी आवाज में ‘माई लॉर्ड’ कहकर अपनी बहस शुरू करता है, तो थिएटर में बैठे दर्शक अपनी सांस रोक लेते हैं. एक बेहतरीन कोर्टरूम ड्रामा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह देखने वाले को जज की कुर्सी पर बैठकर फैसले पर सोचने पर मजबूर कर देता है. भारत में पैरेलल और मेनस्ट्रीम दोनों तरह के फिल्मों ने कानूनी क्षेत्र को बहुत गंभीरता से और कभी-कभी बहुत मनोरंजक तरीकों से दिखाया है. आज हम आपको 6 ऐसी ही चुनिंदा फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अब तक की बेस्ट कोर्ट-रूम ड्रामा मानी गई है.

1. पिंक: डायरेक्टर अनिरुद्ध रॉय चौधरी की ‘पिंक’ को बॉलीवुड के इतिहास में महिलाओं के अधिकारों और सहमति के मुद्दे पर बनी सबसे जरूरी फिल्मों में से एक माना जाता है. अमिताभ बच्चन की दमदार आवाज और दीपक सहगल के रोल में उन्होंने कोर्ट में ऐसी दलीलें दीं जिसने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया. कहानी 3 कामकाजी महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक अमीर परिवार के आदमी के खिलाफ सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस फाइल करती हैं. जिस तरह से कोर्ट-रूम के अंदर लड़कियों के कैरेक्टर को बदनाम किया जाता है और अमिताभ बच्चन का ‘नो मीन्स नो’ के साथ जवाब देना, डरावना है.

2. सेक्शन 375: अक्षय खन्ना और ऋचा चड्ढा स्टारिंग यह फिल्म इस जॉनर की सबसे अंडररेटेड और दिमाग घुमा देने वाली फिल्मों में से एक है. कहानी इंडियन पीनल कोड के सेक्शन 375 (रेप) के इर्द-गिर्द घूमती है. कोर्ट-रूम के अंदर, 2 बहुत काबिल वकील- एक आरोपी (अक्षय खन्ना) का केस लड़ रहा है और दूसरा पीड़ित (ऋचा चड्ढा) का आमने-सामने हैं. फिल्म बहुत ध्यान से दिखाती है कि कैसे कानून और न्याय कभी-कभी दो अलग-अलग चीजें बन सकते हैं. स्क्रीनप्ले इतना टाइट है कि दर्शकों को आखिरी मिनट तक पता ही नहीं चलता कि असली गुनहगार कौन है.
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3. जय भीम: साउथ के सुपरस्टार सूर्या की तमिल फिल्म ‘जय भीम’, जो हिंदी में भी उपलब्ध है, एक सच्ची घटना पर आधारित है जो आपकी आंखों में आंसू ला देगी. फिल्म में एक गरीब आदिवासी आदमी पर पुलिस चोरी का झूठा आरोप लगाती है और कस्टडी में उसकी मौत हो जाती है. इसके बाद, वकील चंद्रू (सूर्या) बिना कोई फीस लिए हेबियस कॉर्पस पिटीशन के जरिए कोर्ट में केस लड़ता है. जिस तरह से कोर्ट-रूम के अंदर पुलिस की क्रूरता और सरकारी मशीनरी के झूठ का पर्दाफाश होता है, वह इस फिल्म को एक कल्ट सिनेमैटिक विरासत बनाता है.

4. जॉली एलएलबी: अगर आपको सीरियस सस्पेंस के बीच थोड़ा ह्यूमर और तीखा सटायर पसंद है, तो अरशद वारसी और बोमन ईरानी की ‘जॉली एलएलबी’ एक परफेक्ट च्वाइस है. दिल्ली के एक हिट-एंड-रन केस पर आधारित यह फिल्म दिखाती है कि कैसे अमीर लोग पैसे का इस्तेमाल करके इंसाफ खरीद सकते हैं. जब एक छोटा, स्ट्रगलिंग वकील, जॉली, देश के सबसे महंगे वकील, तेजपाल राजपाल का सामना करता है, तो कोर्-टरूम का माहौल सच में बहुत शानदार होता है. जज के तौर पर सौरभ शुक्ला की परफॉर्मेंस और उनके रियलिस्टिक डायलॉग फिल्म के खास पल हैं.

5. रुस्तम: अक्षय कुमार स्टारिंग ‘रुस्तम’ 1959 के मशहूर केएम नानावटी बनाम महाराष्ट्र राज्य केस से इंस्पायर्ड है. इस फिल्म में एक नेवी ऑफिसर अपनी पत्नी के लवर का मर्डर कर देता है और कोर्ट में अपना केस खुद लड़ता है. केस की सबसे खास बात जूरी सिस्टम का इस्तेमाल था. कोर्ट में चल रही गवाही और मीडिया के दबाव के बीच, रुस्तम के केस का क्लाइमैक्स देखने लायक है, जिसमें उसका देशभक्ति वाला कार्ड पासा पलट देता है.

6. मुल्क: अनुभव सिन्हा के डायरेक्शन में बनी ‘मुल्क’ एक बोल्ड और काम की कोर्ट-रूम ड्रामा है. कहानी एक मुस्लिम परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका बेटा आतंकवादी गतिविधियों में शामिल हो जाता है और पूरे परिवार को समाज और कानून के सामने अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए मजबूर होना पड़ता है. कोर्ट में ऋषि कपूर (मुराद अली मोहम्मद) का बेबस लेकिन इज्जतदार बर्ताव और तापसी पन्नू की तीखी कानूनी दलीलें दर्शकों के दिल को छू जाती हैं. फिल्म कोर्ट की कार्रवाई के जरिए समाज में फैली धार्मिक भेदभाव को बेरहमी से उजागर करती है.

