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Madhuri Dixit Best movie : फिल्में समाज का आईना होती हैं. समाज की यथार्च सच्चाई आर्ट फिल्मों में सटीकता से दिखाई देती है. बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस हमेशा पैरेलल सिनेमा से दूरी बरतती रही हैं. उन्हें कॉमर्शियल सिनेमा ही भाता है. मसाला फिल्में जितनी ज्यादा बॉक्स ऑफिस पर सफल होती हैं, एक्ट्रेस की स्टार वैल्यू उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है. 90 के दशक की लेडी सुपर स्टार माधुरी दीक्षित ने करियर के पीक पर पैरेलल सिनेमा में काम किया था. उनके दोस्तों-शुभचिंतकों ने इस फिल्म में काम ना करने की नसीहत दी थी. माधुरी नहीं मानी. फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप जरूर हो गई दर्शकों के दिल में बस गई. आज उस फिल्म की गिनती बॉलीवुड की कल्ट मूवी में होती है. फिल्म में 90 के दशक का एक सबसे रोमांटिक गाना था.

श्याम बेनेगल को बॉलीवुड में पैरेलल सिनेमा का जनक माना जाता है. शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह ने पैरेलल सिनेमा में खूब काम किया. शशि कपूर भी यथार्थ सिनेमा बनाने के लिए जाने जाते थे. 90 के दशक में प्रकाश झा ने भी गंभीर मुद्दों पर फिल्में बनाईं. बिहार की पृष्ठभूमि, आर्थिक असामनता, राजनीति-समाज की सच्चाई को पर्दे पर उतारा. इन फिल्मों ने समाज को झकझोर कर रख दिया. माधुरी दीक्षित ने सोशल इश्यू पर बेस्ड ऐसी ही एक फिल्म में काम किया था. शानदार एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया था. यह फिल्म मृत्यु्दंड थी जिसका निर्देशन प्रकाश झा ने किया था.

‘कह दो एक बार सजना, इतना क्यों प्यार सजना, ऐसा भी मुझमें क्या है रे’ माधुरी दीक्षित का यह गाना 90 के दशक के रोमांटिक सॉन्ग में शामिल है. माधुरी दीक्षित, शबाना आजमी, ओमपुरी, मोहन अगाशे और अयूब खान स्टारर इस फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन प्रकाश झा ने किया था.

मृत्युदंड फिल्म 11 जुलाई 1997 को रिलीज हुई थी. फिल्म में बिहार के ग्रामीण इलाकों की हालत, पुरुष-प्रधान समाज, भ्रष्टाचार, जमींदारी व्यवस्था और महिलाओं के शोषण को दिखाया गया. कहानी मुख्य रूप से तीन साहसी महिलाओं के इर्द-गिर्द घूमती है जो समाज की जड़ता और दमनकारी पुरुषों के खिलाफ आवाज उठाती हैं. माधुरी दीक्षित, शबाना आज़मी और शिल्पा शिरोडकर ने ये रोल निभाए थे.
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फिल्म में माधुरी दीक्षित ने केतकी का रोल निभाया था. शबाना आज़मी ने चंद्रावती की भूमिका में शानदार परफॉर्मेंस दी थी. इसके अलावा, ओम पुरी, अयूब खान, मोहन आगाशे और मोहन जोशी जैसे सितारों ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं.

माधुरी दीक्षित ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके शुभचिंतकों और दोस्तों ने इस फिल्म में काम ना करने की सलाह दी थी. सबका मानना था कि माधुरी दीक्षित की स्टार वैल्यू घट जाएगी. माधुरी दीक्षित ने कहा था, ‘उन दिनों कॉमर्शियल फिल्म एक्ट्रेस आर्ट फिल्म नहीं करती थी. मेरे मैनेजर मनमोहन शेट्टी तो हैरान रह गए थे. मुझे मृत्युदंड की कहानी बहुत पसंद आई थी. मुझे लगा कि कहानी महिला सशक्तिकरण के बारे में है. प्रकाश झा हर फ्रेम में पहले एक्टिंग करके दिखाते थे. फिर मैं वैसी ही एक्टिंग करती थी.’

‘मृत्युदंड’ फिल्म का म्यूजिक आनंद-मिलिंद ने कंपोज किया था. फिल्म में कुल 5 गाने थे. फिल्म का सबसे फेमस गाना ‘कह दो एक बार सजना, इतना क्यूं प्यार सजना’ था, जिसे उदित नारायण अलका याज्ञनिक ने गाया था. बताया जाता है कि पहले यह फिल्म जूही चावला को ऑफर हुई थी लेकिन उन्होंने रिजेक्ट कर दी थी.

पहले इस फिल्म का टाइटल ‘अभिशप्त’ था जिसे बदलकर ‘मृत्युदंड’ किया गया. ‘मृत्युदंड’ माधुरी की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है. फिल्म कॉमर्शियल और आर्ट फिल्म के बीच का अच्छा बैलेंस बनाती है. दमदार सोशल ड्रामा है जो आज भी प्रासंगिक लगती है.

पौने 3 करोड़ के बजट में बनी ‘मृत्युदंड’ 100 स्क्रीन पर रिलीज हुई थी. फिल्म ने करीब 4 करोड़ का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन किया था. बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म फ्लॉप रही थी लेकिन समय के साथ इस फिल्म के प्रति दर्शकों में दीवानगी बढ़ती गई. आज इसकी गिनती कल्ट मूवी में होती है.

