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बॉलीवुड में कई संगीतकार आए और गए, लेकिन लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी ने जो जादू लोगों के दिलों पर चलाया, वो आज भी कायम है. संघर्ष से भरी जिंदगी से निकलकर लक्ष्मीकांत ने अपने दोस्त प्यारेलाल के साथ मिलकर हिंदी सिनेमा को ऐसे गाने दिए, जो आज भी हर पीढ़ी की जुुबां पर हैं. उनकी दोस्ती, मेहनत और संगीत का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा.

नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में जब भी सदाबहार संगीत की बात होती है, तो लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की जोड़ी का नाम जरूर लिया जाता है. इस जोड़ी ने दशकों तक अपने संगीत से लोगों के दिलों पर राज किया. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस सुपरहिट जोड़ी के पीछे संघर्ष, गरीबी और गहरी दोस्ती की एक भावुक कहानी छिपी हुई है.

25 मई 1998 को लक्ष्मीकांत ने दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन उनकी और प्यारेलाल की दोस्ती आज भी मिसाल मानी जाती है. लक्ष्मीकांत के जाने के बाद भी प्यारेलाल आज तक किसी मंच पर अकेले परफॉर्म नहीं करते. वह आज भी हर जगह खुद को ‘लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल’ ही कहलाना पसंद करते हैं.
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