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मशहूर गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी का जन्म 1 अक्टूबर 1919 को हुआ था. पेशे से हकीम रहे मजरूह साहब की जिंदगी तब बदली, जब 1945 के एक मुशायरे में उनकी शायरी से फिल्ममेकर एआर कारदार बेहद प्रभावित हुए. एआर कारदार ने उन्हें संगीतकार नौशाद से मिलवाया, जिसके बाद उन्हें फिल्म ‘शाहजहां’ (1946) से बड़ा ब्रेक मिला. उन्होंने नौशाद से लेकर एआर रहमान तक कई पीढ़ियों के संगीतकारों के साथ काम किया. उन्होंने ‘चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे’ जैसे अनगिनत सदाबहार गीत दिए. वह दादासाहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले पहले गीतकार थे. 24 मई 2000 को उनका निधन हो गया.
मजरूह सुल्तानपुरी दादासाहेब फाल्के पुरस्कार पाने वाले पहले गीतकार थे.
नई दिल्ली: दिग्गज गीतकारों में शुमार मजरूह सुल्तानपुरी का नाम बड़े आदर से लिया जाता है. 1 अक्टूबर 1919 को उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में असरार उल हसन खान के रूप में जन्मे मजरूह की शुरुआती पढ़ाई मदरसे में हुई और बाद में उन्होंने यूनानी चिकित्सा की पढ़ाई कर हकीम की उपाधि भी हासिल की. हालांकि, उनकी किस्मत में मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि अपने शब्दों से लोगों के दिलों को सुकून देना लिखा था. सुल्तानपुरी में रहते हुए उन्होंने गजलें लिखना शुरू किया और मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी की छत्रछाया में अपनी शायरी को निखारा. उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 1945 में आया, जब वे बॉम्बे के साबू सिद्दीकी इंस्टीट्यूट में एक मुशायरे का हिस्सा बने. वहां उनकी शायरी सुनकर मशहूर फिल्ममेकर एआर कारदार इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत जिगर मुरादाबादी के जरिए मजरूह से संपर्क किया और बॉलीवुड को एक नायाब हीरा सौंपने की तैयारी कर ली.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें

