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Exclusive: अनुपम खेर ने 5वीं क्लास में किया पहला नाटक, जयचंद बने लड़के उठाकर पटका, 500 बार कर चुके 1 ही ड्रामा

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Anupam Kher on Theatre: अनुपम खेर ने मुंबई में थिएटर शो ‘जाने पहचाने अनजाने’ में परफॉर्म किया. न्यूज18 हिंदी से एक्सक्लुसिव बातचीत में उन्होंने बताया बरसों बाद थिएटर करने की वजह बताई. इसके साथ ही उन्होंने अपने स्कूल में किए पहले प्ले और पत्नी किरण खेर के साथ पहले थिएटर का जिक्र भी किया.

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Anupam Kher Exclusive: अनुपम खेर ने 5वीं क्लास में किया पहला नाटकZoom

अनुपम खेर ने थिएटर से लगाव के बारे में बात की. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

मुंबई. अनुपम खेर फिल्म इंडस्ट्री के सबसे पॉपुलर और प्रतिभाशाली कलाकार हैं. उन्होंने 500 से ज्यादा फिल्में की हैं. फिल्मों के साथ-साथ वह थिएटर में भी एक्टिव हैं. हाल ही में मुंबई में उन्होंने ‘जाने पहचाने अनजाने’ नाम के थिएटर शो में परफॉर्मेंस दी. न्यूज18 हिंदी से बातचीत करते हुए उन्होंने थिएटर से जुड़े किस्से को शेयर किया है. उन्होंने कहा कि भले ही फिल्मों से उन्हें पॉपुलैरिटी मिली हो, लेकिन थिएटर से उन्हें सुकून मिलता है. इसलिए वह आज भी थिएटर से जुड़े हैं.

अनुपम खेर ने न्यूज18 हिंदी से एक्सक्लुसिव बातचीत में कहा,”ऐसा लगता है मैंने थिएटर छोड़ा ही नहीं. जब मैंने फिल्में ज्वाइन की, उसके तीन-चार में मैंने अपना पहला नाटक किरण जी के साथ किया. नाटक कान ‘सालगिरह’ था. फिरोज खान ने उसे डायरेक्ट किया था. वो हमने 7-8 साल किया था. फिर मैंने दूसरा प्ले- ‘कुछ भी हो सकता है’ किया. वो मेरे जीवन पर आधारित है. वो 21 साल से अभी भी करता आ रहा हूं. 500 शोज उसके हो चुके हैं.”

अनुपम खेर ने आगे कहा,”फिर मैंने नीना गुप्ता जी के साथ एक प्ले- ‘मेरा वो मतलब नहीं था’ किया था. मैंने हर दशक में एक नया नाटक चुना है. और 8-10 महीने पहले मेरे मन में एक बहुत ही खतरनाक हूक उठी थी नाटक करने की. इसकी दो वजह हैं. एक तो क्या है कि नाटक जो जिंदगी से जोड़कर रखते हैं. ऑडियंस से जोड़कर रखते हैं. और जब लगता है कि किसी एक्टर पर जंग लग रहा है, तो नाटक करने से वो जंग हट जाता है. मन को एकाग्र रखने के लिए नाटक करता हूं.”

अनुपम खेर ने 5वीं क्लास में किया था पहला नाटक

अनुपम खेर ने आगे कहा, “मैंने जब स्कूल में पहला नाटक किया था. वो बहुत गंदा हुआ था. मैंने 5वीं क्लास में प्ले किया था. ‘पृथ्वीराज चौहान’. मैं बड़ा पतला था. मुझे इस नाटक में एक पृथ्वीराज चौहान को रोल मिला था. एक दूधवाले के बेटे को जयचंद का रोल मिला. उनका नाम नंद किशोर था. वो नंद किशोर मुझे 5 गुना ज्यादा मोटा था. प्ले के आखिरी में मुझे उसे तलवार से गिराना होता है. मेरा डायलॉग था चला जा चला जा ना बकवास कर. तीन बार बोलना होता है और वो गिर जाता है. और फिर मेरे को फायदा हो जाता है. तो मैं जीत जाता हूं.”

अनुपम खेर को ऑडियंस के सामने पटका

अनुपर खेर ने आगे कहा, “जब पर्दा हटता है. प्ले शुरू होता है. तो नंद किशोर की फैमिली दूधवाले थे हट्टे कट्टे. मूंछों वाले. वो एक तरफ बैठे थे और हमारे खानदान के वाले, स्कूल टीचर्स, क्लर्क वगैरह पतले पतले एक तरफ बैठे थे. मेरे पिता रिलैक्स थे. मैं रिलैक्स था. जब मैं मैंने चला जा चला ना बकवास कर बोला, तो नंदू गिर जाता है. दूसरी बार बोलता हूं गिर जाता है. तीसरी बार बोला, तो ऑडियंस के बीच नंदू के पापा ने कहा कि इस बार गिरा तो घर ना आइयो. इसके इतिहास पलटा. नंदकिशोर पलटा. जयचंद ने उठाकर फिर पृथ्वीराज चौहान को ऑडियंस में फेंक दिया. इस तरह के किस्से फिल्मों में नहीं मिलते.”

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रमेश कुमारSenior Sub Editor

रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी काम करते हैं. इससे पहले हिंदीरश (पिंकविला) में एंटर…और पढ़ें



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