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वो हिंदी फिल्म जिसको लेकर खूब बवाल मचा था. इस फिल्म में शाहरुख खान ने लीड रोल अदा किया था. 1993 में रिलीज हुई ‘माया मेमसाब’ हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिनी जाती है, जिन्होंने अपने समय से काफी आगे जाकर कहानी कहने की कोशिश की थी.

नई दिल्ली. केतन मेहता के निर्देशन में बनी यह फिल्म फ्रेंच लेखक गुस्ताव फ्लोबेयर के प्रसिद्ध उपन्यास ‘मैडम बोवरी’ से प्रेरित थी. उस दौर में भारतीय दर्शक ऐसी फिल्म के लिए तैयार नहीं थे. केतन मेहता ने समय से आगे की परिकल्पना को पर्दे पर उतारा था. फिल्म को काफी विरोध के बाद नेशनल अवॉर्ड मिला था.

फिल्म ने भारतीय परिवेश में रिश्तों, अकेलेपन, अधूरी इच्छाओं और भावनात्मक संघर्ष को बेहद अलग अंदाज में पर्दे पर उतारा. यही वजह है कि रिलीज के तीन दशक बाद भी यह फिल्म चर्चा में बनी रहती है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें युवा शाहरुख खान नजर आए थे, जब वह अभी सुपरस्टार बनने की राह पर थे.

फिल्म ने भारतीय परिवेश में रिश्तों, अकेलेपन, अधूरी इच्छाओं और भावनात्मक संघर्ष को बेहद अलग अंदाज में पर्दे पर उतारा. यही वजह है कि रिलीज के तीन दशक बाद भी यह फिल्म चर्चा में बनी रहती है, खासकर इसलिए क्योंकि इसमें युवा शाहरुख खान नजर आए थे, जब वह अभी सुपरस्टार बनने की राह पर थे.
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फिल्म की कहानी माया नाम की एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार दीप साही ने निभाया था. माया अपनी शादीशुदा जिंदगी में भावनात्मक खालीपन महसूस करती है और इसी अधूरेपन से बाहर निकलने के लिए वह प्यार, जुनून और आज़ादी की तलाश में भटकती है. माया अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए बाहर भटकती हैं.

‘माया मेमसाब’ ने जटिल भावनाओं और मनोवैज्ञानिक संघर्षों को केंद्र में रखा. फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, सीन्स और कलात्मक प्रस्तुति इसे बाकी कमर्शियल फिल्मों से बिल्कुल अलग बनाते थे. फिल्म सबसे ज्यादा अपने बोल्ड और अंतरंग दृश्यों को लेकर चर्चा में रही.

फिल्म में शाहरुख खान और दीप साही के बीच कई बोल्ड सीन्स फिल्माए गए थे. दोनों के बीच बोल्ड सीन्स पर काफी विवाद हुआ था. कुछ दृश्यों ने उस समय काफी विवाद खड़ा कर दिया था. 1990 के दशक की मुख्यधारा की हिंदी फिल्मों में ऐसे दृश्य बहुत कम देखने को मिलते थे, इसलिए दर्शकों और मीडिया के बीच इसे लेकर लंबी बहस चली.

उस दौर में सेंसरशिप को लेकर भी सवाल उठे और फिल्म की बोल्डनेस ने लोगों को चौंका दिया. बाद में शाहरुख खान ने भी स्वीकार किया था कि इन दृश्यों को लेकर हुई सार्वजनिक चर्चा से वह असहज हो गए थे.विवादों के बावजूद, फिल्म को क्रिटिक्स ने खूब सराहा. केतन मेहता के निर्देशन, कलाकारों के अभिनय और फिल्म की विजुअल स्टाइल की तारीफ हुई.

यही नहीं, ‘माया मेमसाब’ को नेशनल फिल्म अवॉर्ड में स्पेशल मेंशन (फीचर फिल्म) का सम्मान भी मिला. इसके अलावा फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भी प्रदर्शित किया गया, जहां भारतीय साहित्यिक और कलात्मक सिनेमा के मॉर्डन प्रस्तुति के रूप में इसकी सराहना हुई.

